आगरा। मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे को लेकर उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर गहरी चिंता व्यक्त की है तथा पूरे मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष एवं त्वरित जांच की मांग की है। उन्होंने इस हृदयविदारक घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए मृतकों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की और शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
नवीन जैन ने कहा कि इस हादसे में निर्दोष लोगों की असामयिक मृत्यु ने न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति तथा परिजनों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। अपने पत्र में उन्होंने घटना से जुड़े कई गंभीर सवाल भी उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्राप्त जानकारी के अनुसार मौसम विभाग द्वारा पूर्व में चेतावनी जारी किए जाने के बावजूद संबंधित क्रूज को जल में उतरने की अनुमति दी गई, जो स्पष्ट रूप से गंभीर लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने यह भी प्रश्न उठाया कि जब क्रूज दुर्घटनाग्रस्त हुआ, उस समय रेस्क्यू टीम, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) तथा जल पुलिस तत्काल मौके पर क्यों नहीं पहुंच सकीं। सांसद ने यह भी कहा कि इस प्रकार की जल परिवहन सेवाओं में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन अत्यंत आवश्यक है, किंतु इस घटना में लाइफ जैकेट, आपातकालीन व्यवस्था एवं अन्य सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न किया जाना बेहद चिंताजनक है। यह सीधे-सीधे प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर पर गंभीर चूक की ओर संकेत करता है।नवीन जैन ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि इस घटना की गहन जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि आखिर किन अधिकारियों या संस्थाओं द्वारा क्रूज संचालन की अनुमति दी गई थी और किन परिस्थितियों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी इस प्रकार की लापरवाही करने का साहस न कर सके। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में संचालित सभी क्रूज सेवाओं एवं जल परिवहन व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा कराने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया कि सुरक्षा मानकों को और अधिक सख्त एवं प्रभावी बनाया जाए, नियमित निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत किया जाए, जिससे भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।











