आगरा। आगरा पुलिस आए दिन किसी न किसी को थर्ड डिग्री देकर अपने क्रूर होने के उदाहरण देती रहती है, लेकिन इस बार तो उसने इंसानियत का ही कत्ल कर दिया। कोतवाली और छत्ता पुलिस ने सीमा विवाद के चलते एक नवजात बच्ची के शव को नाली में ही पड़े रहने दिया। दोनों थानों की पुलिस अपनी जिम्मेदारी से इसलिए बचती रही की कौन इसको पोस्टमार्टम के लिए भेजेगा, फालतू का तनाव लेगा। जबकि आगरा कमिश्नरेट पुलिस सेवा, सुरक्षा और संवेदना की बात कहती है। क्या यह नारा सिर्फ दिखावे के लिए है? कल हुए हादसे के बाद तो यही प्रतीत हो रहा है। क्या थाना पुलिस के इस जुर्म की कोई सजा नहीं है। यह सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
रविवार को फ्रीगंज के नीम दरवाजा क्षेत्र में रेलवे पुल के पास एक सूखे नाले में नवजात बच्ची का शव मिला। बेटी पैदा होने पर उसकी मां ने उसे डिब्बे में भरकर फेंका दिया था। फेंकने पर डिब्बे का ढक्कन खुल गया और धड़ बाहर निकल आया। गर्दन डिब्बे में फंसी रह गई। कुत्ते धड़ को नोचने लगे। जिसने भी यह मंजर देखा उसकी रूह कांप गई। लेकिन पुलिस पर कोई असर नहीं पड़ा। मौके पर मौजूद लोग उस मां को कोसते नजर आए जिसने नवजात को जन्म देते ही फेंक दिया, वहीं सूचना पर पहुंची छत्ता और कोतवाली थाने की पुलिस को भी क्यों कि वह सीमा विवाद में उलझकर इंसानियत को शर्मसार कर रही थी। दोनों थानों की पुलिस की लापरवाही की बजह से करीब दो घंटे तक शव नाले में ही पड़ा रहा। अंत में कोतवाली थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
इस लापरवाही से स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना था कि प्रशासन की इस खींचतान ने न केवल शव का अपमान किया, बल्कि मानवता को भी शर्मसार किया। लोगों ने कहा की यह मामला किसी क्षेत्र का हो, सबसे पहले इंसानियत जरूरी है। शव को यूं छोड़ देना दुखद और निंदनीय है।










