आगरा। आगरा कमिश्नरेट में आए दिन भ्रष्टाचार के मामले सामने आते रहते हैं। इस बार सिकंदरा थाने के दरोगा पर 6 हजार रिश्वत लेकर कार छोड़ने का आरोप है। यह भी आरोप है कि कार वापस मिली तो उसमें रखे 16,500 रुपये नकद, एक सोने की अंगूठी और आईफोन चार्जर गायब थे। डीसीपी सिटी से शिकायत होने के बाद उन्होंने एसीपी हरीपर्वत को जांच दे दी है। पीड़ित ने यह भी मांग की है की जांच निष्पक्ष होनी चाहिए।
डीसीपी सिटी से शिकायत करने वाली पीड़िता के अनुसार 9 मई को उसके पति की कार का ट्रैक्टर से एक्सीडेंट हो गया था। हादसे के बाद पुलिस ने उनके पति के खिलाफ 151 की कार्रवाई करते हुए कार को जब्त कर लिया था। पीड़िता का आरोप है कि बाद में उन्होंने मामले की शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर की। शिकायत के बाद संबंधित दरोगा ने उनके पति को थाने बुलाया, जहां उन्हें करीब तीन से चार घंटे तक बैठाए रखा गया। आरोप है कि कार छोड़ने के एवज में दरोगा ने 6 हजार रुपये लिए, जिसके बाद वाहन छोड़ा गया। महिला का कहना है कि जब कार वापस मिली तो उसमें रखे 16,500 रुपये नकद, एक सोने की अंगूठी और आईफोन चार्जर गायब थे। पीड़िता ने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी में वाहन जब्त किया गया था, इसलिए सामान गायब होने की जिम्मेदारी भी संबंधित पुलिसकर्मियों की बनती है।शिकायत पर संज्ञान लेते हुए डीसीपी सिटी ने पूरे प्रकरण की जांच एसीपी हरिपर्वत को सौंप दी है। दरोगा डिवीजन चौकी पर बताया जा रहा है। वह 23 बैच का है। इंस्पेक्टर सिकंदरा अपनी कार्य शैली को लेकर काफी सख्त माने जाते हैं। फिर भी दरोगा वहां मान नहीं रहे हैं। उन्होंने दो टूक कह भी रखा है कि किसी की रिश्वत की शिकायत नहीं आनी चाहिए। इधर कुछ दिनों पहले एक युवक ने पुलिस पर थर्ड डिग्री के आरोप लगाए थे। गुपचुप तरीके से पुलिस ने उसका इलाज करा कर उसे फर्रुखाबाद भेज दिया है। यह मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि रिश्वत का मामला सामने आ गया है। इसी थाने में तैनात एक और दरोगा की कार्यशैली सुर्खियों में छाई हुई है। पूर्व में यह यहां पर लंबे समय तक तैनात रहा है और फिर से री पोस्टिंग करा कर आ गया है। विभाग में चर्चा है कि इस पर कृपा इस कदर है कि आज तक यह पूर्वी और पश्चिमी जोन में नहीं गया है। नगर जोन में ही डटा हुआ है। पुलिस कर्मी आपस में सवाल भी कर रहे हैं कि क्या इसके लिए कोई मानक नहीं है? जगदीशपुरा कांड में भी यह सुर्खियों में छाया था।








