आगरा। आगरा कमिश्नरेट में पुलिस के भ्रष्टाचार के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। विधायक चौधरी बाबूलाल के द्वारा पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार की शिकायत करने का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ था कि एकता थाने के पुलिस वालों का भ्रष्टाचार भी सामने निकल कर आ गया है। आरोप है पति-पत्नी के झगड़े में सुलहनामा शामिल करने के लिए यहां भाजपा के मंडल अध्यक्ष से 20 हजार रुपये की रिश्वत ले ली गई। उनसे यह भी कहा गया कि वैसे तो 50 हजार रुपये लेते लेकिन आप भाजपा के मंडल अध्यक्ष हो इसलिए 30 हजार कम कर रहे हैं। मंडल अध्यक्ष ने जिला अध्यक्ष को पूरी बात बताई जिसके बाद जिलाध्यक्ष ने डीसीपी सिटी से नाराजगी जाहिर करते हुए पूरे मामले की शिकायत की। जिला अध्यक्ष प्रशांत पौनिया ने डीसीपी से कहा कि एकता थाने में भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड टूट रहे हैं। इससे सरकार की छवि खराब हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वहां का जिम्मेदार ऐलान दे रहा है कि उसका कुछ नहीं हो सकता है। डीसीपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की बात कही है।
विजय लोधी भारतीय जनता पार्टी में मंडल अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि आठ दिन पहले क्षेत्र में पति-पत्नी में झगड़ा हो गया था। पत्नी के द्वारा पति के खिलाफ एकता थाने में तहरीर दे दी गई। इधर उन्होंने और सभ्रांत लोगों ने पति-पत्नी के बीच में समझौता करा दिया। समझौता नामे की कॉपी देने के लिए वह थाने में गए तो वहां पर एक पुलिस वाले ने कहा कार्रवाई नहीं करने के लिए वैसे तो इस मामले में 50 हजार लगते लेकिन आप मंडल अध्यक्ष हैं और खुद आ गए हैं, इसलिए 20 हजार रुपये दे दीजिए। मंडल अध्यक्ष ने बताया उन्होंने 20 हजार रुपये उन्हें दिलवा दिए। इधर बुधवार को एक वारंट की जानकारी देने के नाम पर पैसे नहीं मिलने पर ताराचंद्र पुत्र साहब सिंह निवासी अकबरपुर को पुलिस उठाने पहुंच गई। बताया जा रहा है वर्ष 2010 में उनके खिलाफ बिजली चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ था। मुकदमा दर्ज होने के बाद उन्होंने जुर्माने की राशि भी अदा कर दी लेकिन एनओसी नहीं ली। एकता थाने में वारंट का काम देखने वाले पुलिसकर्मी ने उनसे वारंट की जानकारी मतलब उन्हें किस कोर्ट में जाना है और किस तिथि में जाना है, यह बताने के लिए रिश्वत मांगी। उन्होंने रिश्वत देने से मना कर दिया और मंडल अध्यक्ष को पूरी बात बताई। मंडल अध्यक्ष का कहना है कि वह थाना अध्यक्ष सौरभ सिंह से इस बात की शिकायत करने गए लेकिन वह भी तीन दिन तक उन्हें टहलाते रहे और किस कोर्ट में किस तारीख को जाना है, यह जानकारी नहीं दी। बुधवार को पुलिसकर्मी ताराचंद को पकड़ने के लिए पहुंच गए। ताराचंद के पकड़े जाने का क्षेत्रीय लोगों ने पुलिस से कारण पूछा तो पुलिस कुछ नहीं बता पाई। इसके बाद उन्हें छोड़कर आना पड़ा। इन दोनों ही मामलों को लेकर जिला अध्यक्ष प्रशांत पौनिया का पारा चढ़ गया। वह मंडल अध्यक्ष को लेकर डीसीपी सिटी अली अब्बास के पास पहुंच गए। डीसीपी से उन्होंने कहा कि एकता थाने की रिश्वत की उनके पास लगातार शिकायतें आ रही हैं। इससे सरकार की छवि खराब हो रही है। भ्रष्टाचार करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही प्रभारी पर भी। डीसीपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई करने की बात कही। इधर पूर्व में भी जिला अध्यक्ष के द्वारा रिश्वत लेने के कई मामले उठाए जा चुके हैं जिसके बाद ली गई रिश्वत तो अधिकारियों ने वापस करा दी लेकिन भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज नहीं किया। जिनसे पैसे वापस वापस कराए गए उन्हें कुछ दिन साइड लाइन करके बाद में फिर से अच्छी पोस्टिंग दे दी गई। जिला अध्यक्ष प्रशांत पौनिया का कहना है कि जल्दी ही वह आगरा के हालातों से मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें अवगत कराएंगे। मुख्यमंत्री को बताएंगे आगरा की पुलिस किस तरह पब्लिक का शोषण कर रही है। इससे सरकार की छवि खराब हो रही है।
विधायक बाबूलाल ने जिन पुलिस कर्मियों की शिकायत की उसमें एक दरोगा को री पोस्टिंग मिली
आगरा। विधायक चौधरी बाबूलाल के द्वारा जिन 6 पुलिस कर्मियों की पुलिस कमिश्नर से भ्रष्टाचार करने की शिकायत की गई है उनमें रुनकता चौकी प्रभारी आशीष त्यागी का भी नाम शामिल है। यह नाम विभाग में इसलिए सुर्खियों में है कि आशीष त्यागी पूर्व में लंबे समय तक सिकंदरा थाने में रहे हैं उसके बाद भी उन्हें सिकंदरा थाने में ही री पोस्टिंग दे दी गई। पुलिस कर्मियों की तैनाती के लिए अधिकारियों ने नगर और देहात जोन के लिए तीन साल निर्धारित किए हैं, लेकिन आशीष त्यागी के लिए यह नियम दरकिनारे कर दिया और उन्हें हमेशा नगर जोन में ही रखा। आखिर आशीष त्यागी पर इतनी कृपा क्यों है? पुलिसकर्मी भी यह जानकारी करने में जुटे हैं। हाल ही में उन्हें मेडल भी मिला है। विधायक चौधरी बाबूलाल की सूची में उनका नाम होने से सबसे ज्यादा वही सुर्खियों में हैं।











