-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। आखिरकार थैले वाले थानाध्यक्ष शमसाबाद को पुलिस कमिश्नर ने हटा दिया है, उन्हें अपराध शाखा में भेजा गया है। उनके द्वारा थैला भेजा गया था। यह बात सामने निकल कर आ चुकी है। थैले में क्या था? यह बात अभी अधिकारियों के बीच में ही बनी हुई है। हालांकि दरोगा ने दावा किया था की थैले में मोटी रकम थी।
21 नवंबर को सोशल मीडिया पर एक रील वायरल हुई थी। रील में सिर्फ कार के डैश बोर्ड पर 500-500 के नोटों की गड्डियां दिख रही थीं। तेज आवाज में गाना बज रहा था मोटी चैन, मोटा पैसा कोई दिखा तो हमारे जैसा, छोरी चिल्लावे पैसा ही पैसा। रील वायरल होने पर एसआई नितिन भड़ाना ने यह शिकायत की थी। कार उसकी थी। शमसाबाद थाने का कारखास सुमित कार मांगकर ले गया था। एक प्राइवेट व्यक्ति भी उसके साथ था। दोनों कार से एक बैग लेकर गए थे। बैग एसओ शमसाबाद ने भेजा था। बैग में क्या था। इसे लेकर उसने गंभीर आरोप लगाए थे। रील वायरल होने के बाद दरोगा की कार का मिलान कराया गया था। कार उसी की निकली थी। उसे निलंबित किया गया था। पुलिस आयुक्त डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने पूरे प्रकरण की प्रारंभिक जांच एसीपी फतेहाबाद आनंद कुमार पांडेय को दी थी। उन्होंने दरोगा, कारखास, प्राइवेट व्यक्ति सहित कई लोगों के बयान दर्ज किए थे। शुरूआती जांच में इस बात की पुष्टि हुई थी कि कार से थैला गया था। थैला ले जाने पर कारखास सुमित को भी लाइन हाजिर कर दिया गया था। इस बात से और जाहिर हो गया था कि थैला तो गया है। थानाध्यक्ष अनिल शर्मा के भी बयान हुए थे। उन्होंने अपने बयान में कहा था कि उन्होंने थैले में रिश्तेदारों के पास कपड़े भेजे थे। रिश्तेदारों का नाम पता पूछने पर वह नहीं बता पाए थे जिसके बाद उन पर शक की सुई गहरी हो गई थी। इधर जांच निष्कर्ष पर ही थी। डीसीपी पूर्वी ने ट्रांसफर होते समय यह जांच एसीपी फतेहाबाद से हटाकर एसीपी पिनाहट को दे दी। मामला सुर्खियों में छाया हुआ था। विभाग में चर्चाएं हो रही थी कि जिस दरोगा की कार थी उसे निलंबित कर दिया गया है। जो सिपाही थैला लेकर गया था उसे लाइन हाजिर कर दिया गया है तो फिर थानाध्यक्ष पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है? उसे क्यों बचाने के प्रयास किये जा रहे हैं। पुलिस कमिश्नर के द्वारा उन्हें हटाकर अपराध शाखा में भेज दिया गया है। बमरौली कटारा थानाध्यक्ष विकास राणा को बालूगंज चौकी प्रभारी और बालूगंज चौकी प्रभारी रोहित कुमार को बमरौली कटारा का थानाध्यक्ष बनाया गया है। मीडिया सेल प्रभारी राजीव सोलंकी को बरहन थाने का थानाध्यक्ष बनाया गया है। क्योंकि बरहन थाने के थानाध्यक्ष कुलदीप सिंह चौहान के खिलाफ विजिलेंस ने भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कराया है। बरहन में जो राजीव सोलंकी भेजे गए हैं उन्हें अभी खैरागढ़ से हटे 6 महीने पूरे नहीं हुए हैं फिर भी उन्हें चार्ज कैसे मिल गया? यह बात सुर्खियों में छाई हुई है। खैरागढ़ से भी उन्हें शिकायत पर ही हटाया गया था। विधायक ने उन पर खनन के आरोप लगाए थे।











