आगरा। आगरा नगर निगम में विकास कार्यों की फाइलों के लंबित होने को लेकर भाजपा के नामित पार्षद सुनील करमचंदानी नगर आयुक्त ऑफिस में धरने पर बैठ गए। वहां उन्होंने जमकर हंगामा किया। आरोप था करीब छह महीने से शौचालय निर्माण के प्रस्ताव की फ़ाइल को अधिकारी दाब कर बैठे हैं। पार्षद ने अधिकारियों पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि उनके प्रस्ताव को लंबे समय तक लंबित रखा गया, जबकि उसी क्षेत्र में विपक्षी पार्षद के प्रस्ताव पर तेजी से टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई।
सुनील करमचंदानी के मुताबिक शाहगंज क्षेत्र के रुई की मंडी में स्थानीय लोगों को सार्वजनिक शौचालय की आवश्यकता थी। जनता की मांग को देखते हुए उन्होंने 21 अप्रैल 2026 को नगर निगम में शौचालय निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। इसके लिए संबंधित प्रोजेक्ट फाइल भी तैयार कराई गई थी। पार्षद का आरोप है कि प्रस्ताव देने के बाद वह लगातार नगर निगम के अधिकारियों और संबंधित विभागों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ी। कई महीने गुजरने के बावजूद निर्माण कार्य के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। इसी देरी को लेकर उनका आक्रोश बढ़ता गया। विवाद तब और बढ़ गया, जब इसी क्षेत्र में शौचालय निर्माण के लिए बसपा पार्षद कप्तान सिंह चाहर की ओर से भी प्रस्ताव लगाया गया। सुनील करमचंदानी का आरोप है कि उनकी पुरानी फाइल लंबित रहने के बावजूद बाद में आई इस फाइल को अधिकारियों ने प्राथमिकता देते हुए टेंडर प्रक्रिया में पहुंचा दिया। पार्षद ने सवाल उठाया कि जब दोनों प्रस्ताव एक ही क्षेत्र की जनता की जरूरत से जुड़े थे तो उनके प्रस्ताव पर महीनों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके प्रस्ताव को नजरअंदाज कर दूसरे पार्षद के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से ऐसा संदेश गया कि विकास कार्यों में भी राजनीतिक आधार पर भेदभाव किया जा रहा है। हालांकि, पक्षपात के आरोप पार्षद की ओर से लगाए गए हैं, जबकि नगर आयुक्त ने इस आरोप से अलग अपना पक्ष रखते हुए कहा कि विकास कार्यों की स्वीकृति पार्टी देखकर नहीं, बल्कि जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर की जाती है। विवाद पर नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि नगर निगम में विकास कार्यों की स्वीकृति राजनीतिक दल को देखकर नहीं दी जाती। उनका कहना था कि काम की आवश्यकता और प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्यों को स्वीकृति दी जाती है। नगर आयुक्त ने अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी लेकर फाइलों की स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए। इसके बाद पार्षद को उनके प्रस्ताव पर शौचालय निर्माण की कार्रवाई आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया गया। एक सार्वजनिक शौचालय निर्माण की फाइल से शुरू हुआ विवाद अब नगर निगम की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की प्राथमिकता पर सवाल खड़े कर रहा है।











