-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के एक संविदा कर्मचारी की दोनों किडनी फेल हो गई हैं। वह जिंदगी और मौत के बीच में झूल रहा है। हफ्ते में उसकी तीन डायलिसिस हो रही हैं। फिर भी कर्मचारी को स्थाई करने के नाम पर रिश्वत मांगी जा रही है। कर्मचारी ने राजभवन और विजिलेंस में कुलपति, प्रति कुलपति, कुलसचिव, सहायक कुलसचिव, सहायक कुलसचिव लेखा, प्रोफेसर यूसी शर्मा, सेवानिवृत जज की शपथ पत्र पर शिकायत की है।
संविदा कर्मचारी रवि सक्सेना ने शिकायत की है कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों द्वारा खुलकर रिश्वत मांगी जा रही है। मेरी दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं। मेरी जिंदगी का कोई भरोसा नहीं है। रवि सक्सेना का कहना है कि 9 मार्च 1999 को उनकी डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में अनुबंध पर नियुक्ति हुई थी, उनके द्वारा आईईटी में 10 मार्च 1999 को कार्यभार ग्रहण कर लिया गया। विभिन्न संस्थाओं में कार्यरत अनुबंध, संविदा कर्मचारियों के विनयमितीकरण के संबंध में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी शासनादेश के अनुपालन में संविदा कर्मचारियों को विनयमितीकरण किए जाने को निर्देशित किया गया। जिसके क्रम में विश्वविद्यालय द्वारा 22 तृतीय श्रेणी तथा 21 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का विनयमितीकरण किया गया।
17 मई को सहायक कुलसचिव प्रशासन पवन कुमार द्वारा निदेशक आईईटी को एक पत्र लिखा गया जिसमें उन्होंने रवि सक्सेना, सोमेश शर्मा, नीरज जोहरी, भारत भूषण के संबंध में आख्या मांगी। आख्या में निदेशक ने चारों का विनयमितीकरण करने का सुझाव दिया। इस संबंध में पांच जून 2022 को कार्य परिषद की बैठक में एक चार सदस्य कमेटी बनाई गई जिसमें प्रति कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा, प्रोफेसर संजय चौधरी, प्रोफेसर अनिल वर्मा, ममता सिंह शामिल थी। इस कमेटी को चारों कर्मचारियों का विनियमितीकरण करने के संबंध में अपनी रिपोर्ट पेश करनी थी। रवि सक्सेना का कहना है कि कमेटी के सदस्यों ने विनयमितीकरण करने पर अपना सुझाव दिया, जिसके आधार पर तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने विनयमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया, लेकिन 7 महीने के बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। रवि सक्सेना का कहना है कि सहायक कुलसचिव प्रशासन पवन कुमार सुविधा शुल्क के चक्कर में फाइल को अपने पास दवाए रहे। अंत में मजबूर होकर उन्हें हाईकोर्ट जाना पड़ा। हाईकोर्ट ने तीन सप्ताह के अंदर प्रार्थी के प्रत्यावेदन का निस्तारण करने के निर्देश दिए। रवि सक्सेना का कहना है कि सहायक कुलसचिव प्रशासन पवन कुमार ने कहा कि हम किसी हाईकोर्ट के आदेश को नहीं मानते हैं। अगर अपना विनयमितीकरण कराना है तो सुविधा शुल्क देना ही पड़ेगा। इधर तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी हाईकोर्ट के आदेश का विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई पालन नहीं किया। इसके बाद रवि सक्सेना और उनके एक साथी कर्मचारी ने अवमानना याचिका दाखिल की। अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने एक सप्ताह के अंदर मामले का निस्तारण करने के निर्देश दिए। रवि सक्सेना का कहना है कि हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद फिर से एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई गई जिसमें प्रति कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा, प्रोफेसर यूसी शर्मा, सहायक कुल सचिव लेखा अनूप कुमार, सेवानिवृत जज थे। कमेटी बनने के बाद सहायक कुलसचिव पवन कुमार ने फिर से रवि सक्सेना को बुलाया और उनसे कहा कि पूर्व में जिन कर्मचारियों का विनयमितीकरण हुआ है उन्होंने पांच लाख दिए थे। अपना काम कराना है तो तुम्हें भी खर्चा करना पड़ेगा। अगर खर्चा नहीं दोगे तो फिर तुम हाईकोर्ट चले जाओ या सुप्रीम कोर्ट कुछ भी नहीं होगा। रवि सक्सेना का कहना है कि पैसे की सुनकर उन्होंने पवन कुमार के सामने अपने हाथ जोड़े और कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति खराब है। वह पैसा नहीं दे सकते हैं। इसके बाद पवन कुमार ने कहा कि यह पैसा मैं अकेले अपने पास नहीं रखता हूं। यह पैसा ऊपर तक जाता है जिसमें कुलपति प्रोफेसर आशु रानी, कुलसचिव राजीव कुमार, सेवानिवृत जज, प्रति कुलपति अजय तनेजा, सहायक कुलसचिव लेखा अनूप कुमार और प्रोफेसर यूसी शर्मा शामिल हैं। पवन कुमार कमेटी में शामिल नहीं थे फिर भी वह बार-बार उन पर पैसे के लिए दबाव बनाने में लगे हुए थे। पैसा ना देने की वजह से सहायक कुल सचिव ने ही विनयमितीकरण नहीं होने दिया। जबकि उन जैसे ही तीन केस में सुविधा शुल्क लेकर विनयमितीकरण कर दिया गया। इसके साथ ही इन्होंने यह शिकायत भी की है कि मॉडल स्कूल में एक कर्मचारी की नियुक्ति हुई और उसके बाद में उसका विश्वविद्यालय में ट्रांसफर कर दिया गया। जबकि यह नियम विरुद्ध है। मॉडल स्कूल एक प्राइवेट संस्था है उसे एक ट्रस्ट चलाता है फिर भी अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी कर दी। रवि सक्सेना का कहना है कि कई कर्मचारियों का पैसा लेकर विनयमितीकरण किया गया है। रवि सक्सेना ने उन सभी के नाम भी शपथ पत्र पर शिकायत में दिए हैं। इधर रवि सक्सेना ने यह भी कहा है कि उसकी मौत हो जाने के बाद उसकी मौत के जिम्मेदार शिकायत में शामिल सभी अधिकारी रहेंगे। मामले में प्रति कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा से बात करने के लिए फोन लगाया गया तो उनका फोन नहीं उठा।
एक ही मामले में दो नियम कैसे?
आगरा। सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि जब अन्य कर्मचारियों का विनयमितीकरण कर दिया गया। इनका क्यों नहीं किया गया। जबकि सभी का केस एक समान था। एक ही मामले में दो नियम कैसे बना दिए गए?
कर्मचारी की पत्नी बोलीं दो बार हो चुका है हार्ट अटैक
आगरा। कर्मचारी की पत्नी अंजना सक्सेना से बातचीत की गई तो उनका कहना है कि उनके पति की हालत बहुत खराब है। दिन पर दिन हालत खराब होती जा रही है। उनके पति की हालत के जिम्मेदार विश्वविद्यालय के अधिकारी हैं उन्होंने महिला आयोग में भी शिकायत की है। अंजना सक्सेना का कहना है कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों से उनके पति इतना आहत हो गए कि उन्हें दो बार हार्ट अटैक भी पड़ चुका है। अंजना सक्सेना का यह भी कहना है कि उनके पास इतने पैसे नहीं है कि वह किसी अच्छे हॉस्पिटल में अपने पति का उपचार कर सकें।











