आगरा। जगदीशपुरा कांड में इनामी बिल्डर कमल चौधरी और उनके बेटे धीरू चौधरी को हाईकोर्ट से राहत मिल गई। हाईकोर्ट ने दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। आदेश दिया है कि दोनों विवेचना में पुलिस का सहयोग करेंगे। ऐसा नहीं करने पर पुलिस कोर्ट को बताएगी।
बोदला में 50 करोड रुपए की जमीन पर कब्जा कराने के लिए दो फर्जी मुकदमे दर्ज कर पांच निर्दोष लोगों को जेल भेजा गया था। मामले की तत्कालीन डीजीपी से शिकायत हुई थी। लखनऊ से टीम जांच करने आई थी। जानकारी के बाद कमिश्नरेट पुलिस में खलबली मची थी। आनन-फानन में सात जनवरी को जमीन की कथित मालकिन उमा देवी की तहरीर पर डकैती सहित अन्य धाराओं में मुकदमा लिखा गया था। मुकदमे में एसओ जितेंद्र कुमार, बिल्डर कमल चौधरी उनके बेटे धीरू चौधरी सहित 18 को आरोपित बनाया गया था। सबसे पहले पुलिस ने अमित अग्रवाल को पकड़ा था। उसके बाद एसओ को जेल भेजा। तीसरे नंबर पर पुरुषोत्तम पहलवान की गिरफ्तारी हुई। बिल्डर मुकदमा दर्ज होते ही शहर से फरार हो गए थे।
कमल चौधरी की तरफ से उनके अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में मुकदमा खारिज करने के लिए याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि अमर सिंह, टहल सिंह उसके भाई नाहर सिंह और पदम कुमार जैन, प्रमोद कुमार जैन, प्रभात कुमार जैन, नेम चंद जैन और अभय कुमार जैन के बीच 1974 में एक साझेदारी फर्म खोली गई थी। यह 1980 में खत्म हो गई। टहल पक्ष ने रुपये और दूसरा सामान ले लिया। जमीन दूसरे पक्ष को मिली थी। याचिका में यह कहा गया कि उमा देवी को मुकदमा लिखाने का आधिकार ही नहीं है। जमीन पर उसका कोई हस्तक्षेप ही नहीं है।
हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के बाद बिल्डर कमल चौघरी और उनके बेटे धीरू चौधरी की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। स्टे की ऑन लाइन प्रति पुलिस को भी मिल गई है। डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश पर अमल किया जाएगा। बिल्डर कमल चौधरी और उनके बेटे को विवेचना में सहयोग करना होगा। पुलिस इस मुकदमे में साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करेगी।











