आगरा। खंदौली में एक सैनिक की गर्भवती पत्नी की हादसे में मौत हो गई थी। जिस ट्रैक्टर से मौत हुई थी उसे थाना पुलिस ने लेनदेन कर बदल दिया। पुलिस ने देश की रक्षा करने वाले सैनिक के साथ गद्दारी कर दी। मामले में जांच होने पर तथ्य सही पाए जाने के बाद कांस्टेबल के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उधर थाने में चर्चाएं हैं कि बड़ा खिलाड़ी तो बच ही गया। पूरा खेल तो उसी ने रचा था। ट्रैक्टर बदलने को लेकर बड़ी डील हुई थी। सवाल यह खड़े हो रहे हैं क्या मुख्य किरदार पर भी कार्रवाई नहीं होगी? क्या वह इतना मजबूत है कि अधिकारी भी उस पर कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं?
हाथरस के गांव नगला शेखा के रहने वाले सूरज आइटीबीपी में टेलीकॉम के पद पर कार्यरत हैं। उनके बड़े भाई टेढ़ी बगिया पर रहते हैं, उनसे मुलाकात करने के लिए वह नौ मार्च को अपनी पत्नी और बच्चे के साथ स्कूटी से टेड़ी बगिया पर आ रहे थे। खंदौली में लाल मंदिर के पास आलू से भरे ट्रैक्टर ट्रोला चालक ने उनमें टक्कर मार दी। हादसे में सूरज की गर्भवती पत्नी की मौत हो गई। सूचना पर सूरज के भाई भी पहुंच गए। उन्होंने आलू से भरे ट्रैक्टर ट्राली को पकड़कर थाने में दे दिया। जो ट्रैक्टर उन्होंने पकड़ कर दिया था पुलिस ने उसे थाने में बदल दिया। मामले में किसी ने शासन को ट्वीट भी किया। अधिकारियों तक जब यह शिकायत पहुंची तो उन्होंने मामले में जांच शुरू कर दी। एसीपी सुकन्या शर्मा देर रात तक थाने में ही बैठी रहीं। उन्होंने अपनी जांच में पाया कि ट्रैक्टर बदला गया है।
देर रात थानाध्यक्ष की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया है। उसमें कहा गया है कि घटना में प्रयुक्त ट्रैक्टर को बदल दिया गया है। वीडियो को देखने पर ज्ञात हुआ की घटना के समय ट्रैक्टर आईशर 380 सिल्वर कलर का दिखाई दे रहा है, लेकिन डंपिंग ग्राउंड पर नीले रंग का सोनालिका ट्रैक्टर खड़ा दिखाई दे रहा है। जिसकी जांच मेरे द्वारा की गई तो पाया गया 9 मार्च 2024 को घटना के समय सिल्वर कलर का आयशर 380 ट्रैक्टर में ट्राली के साथ परंतु डंपिंग ग्राउंड में उक्त ट्रैक्टर की जगह सोनालिका रंग नीला खड़ा है। प्रथम दृष्टया पाया गया कि कांस्टेबल प्रवीण कुमार द्वारा प्रतिपक्षी से साठगांठ कर घटना के मूल ट्रैक्टर को छोड़ दिया गया।
यह सवाल खड़े हो रहे
– क्या एक कांस्टेबल की इतनी हिम्मत है कि वह थाने से ट्रैक्टर को बदलवा दे
– शासन पर ट्वीट होने के बाद ही पुलिस क्यों जागी उससे पहले थानाध्यक्ष और विवेचक की इस बात पर नजर क्यों नहीं पड़ी कि ट्रैक्टर बदल दिया गया है
– जो ट्रैक्टर बदला गया था आखिर वह कहां गया, वह किसका था
– ट्रैक्टर बदलने की डील में आखिर कौन-कौन शामिल थे
– ट्रैक्टर मौके से पकड़ा गया था तो जीडी मुंशी ने उसका नंबर जीडी पर अंकित क्यों नहीं किया
– विवेचक ने अपने पर्चे में ट्रैक्टर नंबर कौन सा लिखा है











