आगरा। शंकर ग्रीन बिल्डर के खिलाफ धोखाधड़ी के संबंध में हरीपर्वत थाने में दो मुकदमे दर्ज हुए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पैसे लेने के बाद भी बिल्डर ने उन्हें फ्लैट नहीं दिए। इसके साथ ही उन्होंने जो 14 फ्लैट खरीदे थे उनमें से पांच फ्लैट साजिश के तहत किसी और को बेच दिए।
शिकायतकर्ता अनुराग अग्रवाल का आरोप है कि उन्होंने शंकर ग्रीन बिल्डर से वर्ष 2015 में ताज नगरी फेज 2 में 7 फ्लैट खरीदे। इसके लिए उन्होंने बिल्डर को 4 करोड़ 19 हजार, 480 रुपये दिए। वर्ष 2016 में उन्होंने फिर से 7 फ्लैट और खरीदे। इसके लिए उन्होंने दोबारा चार करोड़ रुपये दिए। अनुराग अग्रवाल को पता चला कि वर्ष 2015 में उन्होंने जो 7 फ्लैट खरीदे थे उसमें से एक फ्लैट बिल्डर ने साजिश के तहत राहुल नमा और रति नमा को बेच दिया है। इसके साथ ही वर्ष 2016 में जो फ्लैट खरीदे थे, उन 7 फ्लैट में से 4 फ्लैट मनीष सिंगल और शरद बंसल को बेच दिए हैं। पुलिस ने दोनों मामलों में धोखाधड़ी सहित कई अन्य धाराओं में दीपेंद्र शंकर अग्रवाल, हिमांशु अग्रवाल, रवि शंकर, नवीन अग्रवाल, मनीष सिंघल, शरद बंसल, राहुल नमा, रति नमा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। अनुराग अग्रवाल का यह भी आरोप है कि बिल्डर ने शंकर ग्रीन का अभी तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी एडीए से प्राप्त नहीं किया है। नक्शे की भी समय सीमा समाप्त हो गई है।
इधर मामले में शंकर ग्रीन के दीपेंद्र अग्रवाल का कहना है कि उनके खिलाफ जो एफआईआर दर्ज कराई गई हैं उसमें शिकायतकर्ता ने तथ्य छिपाए हैं। वर्ष 2018 में शिकायतकर्ता से उनका दोबारा एग्रीमेंट हुआ था, जिसमें शिकायतकर्ता ने खरीदे गए फ्लैटों की जगह बड़े फ्लैट देने के लिए कहा था। इसके लिए वह पैसे नहीं दे पाए, जिसके बाद उनके द्वारा दिए गए पांच करोड़ 60 लाख रुपये उन्हें वापस कर दिए गए। दीपेंद्र अग्रवाल का यह भी कहना है कि उनकी कंपनी के प्रतिनिधि मानसिंह ने मार्च 2022 में फिरोजाबाद में कोर्ट के माध्यम से शिकायतकर्ता और अन्य लोगों के खिलाफ एक एफआईआर भी दर्ज कराई है।











