आगरा। छत्ता थाने की जीवनी मंडी चौकी में नाबालिग को थर्ड डिग्री दिए जाने के मामले में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के कहने के बाद दोषी चौकी प्रभारी और अन्य तीन पुलिस कर्मियों के खिलाफ छत्ता थाने में मुकदमा दर्ज हो गया है। इधर किरावली थाने में युवक को उल्टा लटकाकर उसकी दोनों टांगें तोड़ने के मामले में कई दिन के बाद भी जांच पूरी नहीं होने पर सवाल उठने के बाद जांच पूरी कर ली गई है। थानाध्यक्ष नीरज कुमार और अन्य दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ जल्द मुकदमा दर्ज होने की संभावना है।
सैंया के वीरई गांव के नरेंद्र कुशवाह अपने बड़े भाई धीरज के साथ टेंपो से आगरा में आकर घर-घर जाकर दूध बेचते हैं। टेंपो धीरज चलाते हैं, नरेंद्र को टेंपो चलाना नहीं आता। नरेंद्र ने बताया था कि रोज की तरह भाई के साथ दूध बांटने छत्ता के जीवनी मंडी चौकी क्षेत्र के गरीब नगर आए थे। धीरज उन्हें टेंपो में छोड़कर घरों में दूध देने चले गए। वहां जीवनी मंडी चौकी इंचार्ज रविंद्र कुमार किसी झगड़े की सूचना पर पहुंचे। उन्होंने झगड़ा करने पर कुछ युवकों को पकड़ा और उनके पास आकर टेंपो में युवकों को बिठाकर थाने ले चलने के लिए कहा। उसने बताया कि वह टेंपो चलाना नहीं जानता। इस बात पर वह भड़क गए। पिटाई करते हुए उसे जीवनी मंडी चौकी लाया गया। आरोप है कि वहां चौकी प्रभारी ने पहले जमीन पर गिराकर पीटा। इसके बाद पैर के तलवे पर डंडे बरसाए। मामले में चौकी प्रभारी और अन्य तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। बाद में इंस्पेक्टर पर भी लाइन हाजिर की कार्रवाई हुई। दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा नहीं दर्ज होने से पंडित परिवार और कुशवाहा समाज आक्रोशित थे। आगरा आगमन पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने दोषी पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसके बाद दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है।
दूसरी ओर किरावली के गांव करहरा में पांच अगस्त को सेवानिवृत्त फौजी बलवीर सिंह की हुई हत्या के मामले में 20 दिसंबर को राजू शर्मा को पुलिस ने थाने बुलाया था। पुलिस ने शक के आधार पर राजू से पूछताछ शुरू कर दी। आरोप है कि थानाध्यक्ष नीरज कुमार, एसआई धर्मवीर और सिपाही रवि ने उसे उल्टा लटकाकर पैरों पर डंडे बरसाने शुरू कर दिए। पुलिस की पांच लाठियां टूट गईं। बेहोश होने तक उसे पीटा गया। यह देखकर पुलिसकर्मी घबरा गए। थाने के पिछले दरवाजे से उसे गाड़ी में डालकर किरावली अस्पताल ले गए। मामला तूल पकड़ने के बाद थानाध्यक्ष और अन्य दो पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। पीड़ित परिवार दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कई दिन से मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहा है। मामले की जांच एडिशनल पुलिस कमिश्नर कर रहे थे। जांच में लगातार देरी होता देखकर उनकी जांच पर सवाल खड़े हो रहे थे। फिर किरकिरी होने के बाद उन्होंने अपनी जांच पूरी कर ली है। इसमें पुलिसकर्मियों को दोषी माना है। जल्दी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो सकता है।











