आगरा। सड़क परिवहन मंत्रालय ने देश के 100 सबसे खतरनाक शहरों में उत्तर प्रदेश के 28 शहरों को शामिल किया है, जिनमें आगरा जोन के पांच जिले भी हैं। प्रदेश सरकार सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर को शून्य करने के लिए प्रयासरत है। आगरा में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिन्हित कर विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं। आगरा पुलिस प्रशासन ने सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को रोकने और यातायात व्यवस्था को और अधिक सुरक्षित व प्रभावी बनाने के उद्देश्य से ज़ीरो फेटैलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेएफडी) अभियान तथा ‘ट्रैफिक माह 2025’ के तहत व्यापक अभियान शुरू किया है। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार और जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी के निर्देशन में शहर भर में जागरूकता, निगरानी और सुरक्षा उपायों को तेज किया गया है।
पुलिस उपायुक्त यातायात सोनम कुमार ने पुलिस उपायुक्त पूर्वी और सभी सहायक पुलिस आयुक्तों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों को पूर्णतः रोकने के लिए लागू किए जा रहे जेडएफडी अभियान की प्रगति, चुनौतियों और अगले चरणों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने ब्लैक स्पॉट चिन्हीकरण, संवेदनशील मार्गों पर अतिरिक्त निगरानी, यातायात प्रवाह में सुधार तथा दुर्घटना रोकथाम के लिए तकनीक आधारित उपायों को तेज करने पर जोर दिया। इस समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि आगरा में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए जेएफडी को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। सभी अधिकारियों को अभियान को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने, लगातार मॉनिटरिंग रखने और प्रत्येक स्तर पर त्वरित सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
ट्रैफिक माह–2025 का शुभारंभ और जागरूकता कार्यक्रम
ट्रैफिक माह–2025 के तहत आगरा में व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया गया, जिसका उद्घाटन पुलिस उपायुक्त पश्चिमी अतुल शर्मा ने फीता काटकर किया। कार्यक्रम के दौरान खेरागढ़ क्षेत्र में दोपहिया वाहन चालकों को हेलमेट वितरित किए गए और उन्हें यातायात नियमों के पालन के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की कि वे हेलमेट व सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें, ओवरस्पीडिंग से बचें और ट्रैफिक सिग्नलों का पालन करते हुए जिम्मेदार नागरिक बनने का संदेश दें। पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों और युवाओं को जिम्मेदार ड्राइविंग अपनाने के लिए प्रेरित किया। सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्रमुख चौराहों और मुख्य सड़कों पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए गए हैं, ताकि निगरानी व नियमों का पालन बेहतर ढंग से सुनिश्चित किया जा सके। अभियान के दौरान अधिकारियों ने कहा कि सड़क हादसों में होने वाली मृत्यु को कम करना तभी संभव है जब नागरिक अपनी भूमिका समझें और सुरक्षित ड्राइविंग को आदत बनाएं। ट्रैफिक माह का उद्देश्य सिर्फ चालान बढ़ाना नहीं, बल्कि सुरक्षित यातायात को संस्कृति बनाना है।
जनवरी से अक्टूबर के दौरान 1209 से अधिक हादसों में 619 लोगों की मौत
आगरा में इस वर्ष जनवरी से अक्टूबर के दौरान 1209 से अधिक हादसों में 619 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। आगरा में राष्ट्रीय राजमार्ग, लखनऊ व यमुना एक्सप्रेसवे पर सर्वाधिक हादसे होते हैं। अलीगढ़, मथुरा और फिरोजाबाद भी एक्सप्रेसवे से लगे हैं। जिसके चलते यहां भी हादसों की संख्या अधिक है। इसी तरह्र मैनपुरी राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे होने के चलते वहां भी बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटना होती हैं।










