-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। क्या डा. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं चाहता है कि केंद्रों में हुई धांधली और पेपर लीक मामले की जांच हो? क्या इसीलिए उसने परीक्षा समिति में बनाई गई जांच समिति के लिए 15 दिन बाद भी जांच के लिए औपचारिक पत्र नहीं निकाला है।
तीन जून को परीक्षा समिति की बैठक हुई थी। बैठक में औटा महामंत्री डॉ. भूपेंद्र चिकारा ने केंद्रों में हुई धांधली और पेपर लीक मामले को प्रमुखता से उठाया था। कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने सभी सदस्यों के सामने कहा था कि जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया जा रहा है। इसमें प्रति कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा, सेंट जॉन्स कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर एसपी सिंह, आरसीए गर्ल्स डिग्री कॉलेज मथुरा की प्राचार्य डॉ. प्रीति जौहरी और औटा के महामंत्री डॉ. भूपेंद्र चिकारा शामिल रहेंगे। यह समिति दोनों मामले की जांच करेगी। जांच करने के लिए समिति के सदस्य पिछले 15 दिन से विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी होने वाले पत्र का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन यह जारी नहीं किया जा रहा है। पत्र को लेकर वह रोजाना पूछ भी रहे हैं परंतु उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। डॉ. भूपेंद्र चिकारा का कहना है कि जांच शुरू होने के बाद केंद्रों में हुई धांधली और पेपर लीक मामले में विश्वविद्यालय की लापरवाही और साजिशन की गई गड़बड़ी की पूरी पोल खुलकर सामने आ जाएगी। इसलिए जांच के लिए पत्र नहीं निकाला जा रहा है। एक ओर अधिकारी परीक्षा समिति में दावा करते हैं कि जांच होगी दूसरी तरफ पत्र नहीं जारी कर रहे हैं। इसके निहितार्थ समझे जा सकते हैं।
इधर पत्र क्यों नहीं निकला है इस मामले में प्रति कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा से बातचीत की गई तो उनका कहना है कि वह इस मामले में जानकारी कर रहे हैं कि 15 दिन बाद भी पत्र क्यों नहीं निकला है।
विश्वविद्यालय को जल्द मिल सकता नया कुलपति
आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय पिछले एक साल से स्थाई कुलपति के बिना चल रहा है। विशेष सूत्रों का कहना है कि कुलपति के लिए 5 नाम फाइनल हो गए हैं। कुलाधिपति जल्दी ही इनका साक्षात्कार लेकर इनमें से किसी एक को फाइनल कर सकती हैं। पहले 15 प्रोफेसरों के भी साक्षात्कार हुए थे, उनमें आम्बेडकर विश्वविद्यालय के भी कुछ प्रोफ़ेसर शामिल थे।











