-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय ने रविवार को केंद्रों की फाइनल सूची जारी कर दी है। इसमें भी जियो टैगिंग फेल नजर आई। कुलपति ने जियो टैगिंग को लेकर कुलाधिपति के सामने जो बड़ी-बड़ी बातें कही थी, वह हवाई साबित हुई। फाइनल सूची में भी 40 किलोमीटर दूर केंद्र डाले गए हैं। छात्राओं का सेंटर भी 30 किलोमीटर दूर डाला गया है। छात्र-छात्राएं कैसे पेपर देने जाएंगे। यह सोचकर परेशान हैं। सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि कुलपति दो महीने से जिस जियो टैगिंग की बात कर रहे हैं, क्या वह दीक्षांत समारोह में सिर्फ कुलाधिपति को बताने तक सीमित थी? अगर सीमित नहीं थी तो सेंटर पास के कॉलेजों में क्यों नहीं डाले गए?
बता दें कि कार्यवाहक कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति के सामने कहा था कि 934 कॉलेजों की जियो टैगिंग कर दी गई है। इधर परीक्षा केंद्रों की सूची जारी होते ही इस जियो टैगिंग की धज्जियां उड़ गईं। पहली सूची जारी करने के बाद विवि प्रशासन द्वारा कहा गया कि जो गड़बड़यां हुई हैं, वह फाइनल सूची में सही कर दी जाएंगी। रविवार को फाइनल सूची भी जारी हो गई। कई कॉलेजों का केंद्र विवि ने 40 किलोमीटर दूर डाल दिया है। यहां के छात्र परीक्षा देने कैसे जाएंगे। यह सोच-सोचकर वह परेशान हैं। कम से कम एक घंटा उन्हें केंद्र तक पहुंचने में लगेगा। अगर वह लेट हो गए तो वाहन तेज चलाएंगे। ऐसे में किसी छात्र के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
उदाहरण के तौर पर एआरएल महाविद्यालय मालव का केंद्र श्री लाला राम शर्मा मेमोरियल महाविद्यालय में गया है। एआरएल से इस केंद्र की दूरी करीब 41 किलोमीटर है। इसी प्रकार एमएसकेएस कुशवाह मैमोरियल महाविद्यालय की छात्राओं का केंद्र सत्यवती देवी महाविद्यालय में डाला गया है। दोनों के बीच की दूरी 27 किलोमीटर है। शासन का भी आदेश है छात्राओं का केंद्र दूर नहीं डाला जाए, लेकिन विवि पर कोई असर नहीं है। श्रीमती कलावती देवी महाविद्यालय का केंद्र शांति उदयराम कॉलेज अकोला में डाला गया है। दोनों के बीच की दूरी 40 किलोमीटर है। कॉलेज संचालक ने कुलपति को पत्र भी लिखा लेकिन केंद्र नहीं बदला गया। कॉलेज संचालक लिखकर दे रहे हैं फिर भी विवि प्रशासन के कानों में जूं नहीं रेंग रही है।
रिश्तेदारों की जोड़ी मशहूर
जानकार सूत्रों की मानें तो अलीगढ़ के दो परस्पर रिश्तेदार लोगों की जोड़ी विवि में मशहूर चल रही है। दोनों के द्वारा दबाकर केंद्र बनाए गए हैं। केंद्र बनाने में जमकर वसूली भी की गई है। अलीगढ़ के कॉलेज वालों का तो इस जोड़ी ने बहुत शोषण किया है क्योंकि दोनों का अलीगढ़ से वास्ता है। बीते साल भी उन्होंने अलीगढ़ से मोटी वसूली की थी। इनमें से एक ने तो एक कॉलेज में उड़नदस्ते के पहुंचने पर वहां से टीम को तत्काल वापस बुला लिया था। ये दोनों समाजवादी पार्टी के समर्थक हैं। भाजपा सरकार में उनके द्वारा भ्रष्टाचार किया जा रहा है। भाजपा नेता इस बात की शिकायत मुख्यमंत्री से करने में जुट गए हैं। इधर इनमें से एक पर एक बड़े साहब का हाथ रखा है। बड़े साहब भी विवि में नियम विरुद्ध काम करने में मशहूर चल रहे हैं।
अलीगढ़ के कॉलेज का मथुरा में डाला गया केंद्र
अलीगढ़ के एक कॉलेज का मथुरा जिले में केंद्र डाला गया है। यहां भी विश्वविद्यालय की जियो टैगिंग फेल नजर आई। बता दें कि डीडीएस कॉलेज खैर का बाबा कन्हैया महाविद्यालय बाजना में सेंटर डाला गया है। डीडीएस कॉलेज से इसकी दूरी काफी है। यहां तो विश्वविद्यालय ने जिला ही चेंज कर दिया।










