आगरा। शनिवार को विधान परिषद की संसदीय अध्ययन समिति की समीक्षा बैठक में आगरा के अधिकारियों के पसीने छूट गए। नगर आयुक्त के नहीं पहुंचने पर उन्हें लखनऊ तलब किया गया है।
समिति की बैठक जैसे ही शुरू हुई और सदस्यों ने लोक निर्माण विभाग से मुख्य अभियंता बारे में पूछा तो बताया गया उनके स्थान पर अधिशासी अभियंता पहुंचे हैं। इस बात पर सभापति सुरेंद्र चौधरी ने कड़ी नाराजगी जताई। मुख्य अभियंता बिना देर किए सर्किट हाउस दौड़े चले आए। यही नहीं, नगरायुक्त की अनुपस्थिति पर भी सभापति ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई और साक्ष्यों सहित नगरायुक्त व अपर नगरायुक्त को अपर मुख्य सचिव नगर विकास विभाग के समक्ष तलब करने के निर्देश दिए। बैठक में आगरा जिले के जनप्रतिनिधियों से प्राप्त 563 पत्रों की समीक्षा की गई। बताया गया कि सभी पत्रों का निस्तारण हो चुका है, जिनमें सबसे अधिक ऊर्जा विभाग से जुड़े 258 पत्र थे।
सभापति ने सभी जिलाधिकारियों को बैठक में गैरहाजिर अधिकारियों से एक सप्ताह में स्पष्टीकरण लेकर समिति के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही जनप्रतिनिधियों से संवाद और समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया। समिति ने स्वास्थ्य विभाग को सीएचसी व पीएचसी पर दवाओं की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने और मरीजों को बाहर से दवा खरीदने से रोकने के निर्देश दिए। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क निर्माण, गड्ढा मुक्ति के बारे में जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर विचार किया गया और टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता के निर्देश दिए गये। राशन प्रणाली की समीक्षा में निलंबित दुकानों की बहाली की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा गया। ऊर्जा विभाग को निर्देश: छापेमारी हो, लेकिन उत्पीड़न नहीं। नेडा के कार्यों की भी समीक्षा की गई। बैठक में डीएम अरविंद मल्लप्पा बंगारी, अपर पुलिस आयुक्त राम बदन सिंह, सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव, डीएफओ आदर्श कुमार, एडीएम शुभांगी शुक्ला, एडीए सचिव श्रद्धा शांडिल्य, बीएसए जितेन्द्र गोंड, आदि मौजूद रहे।










