आगरा। आगरा पुलिस का खेल निराला है। यहां के दरोगा जिंदा लोगों को भी मुर्दा बनाने में लगे हुए हैं। जिंदा महिला जो कि शिक्षिका भी है अधिकारियों के सामने यह कहते-कहते थक गई है कि मैं जिंदा हूं, आपके सामने खड़ी हूं फिर भी मुझे मुर्दा बना दिया है। हैरानी की बात तो यह है कि शिकायत के कई महीने बीत जाने के बाद भी ना तो दरोगा पर ही कोई कार्रवाई हुई है और ना ही अवैध कब्जा कर फर्जी रजिस्ट्री करने वाले के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। न्याय नहीं मिलने पर पीड़ित ने आत्मदाह की चेतावनी भी दी है और कहा है कि अगर उसका परिवार आत्मदाह करता है तो उसका जिम्मेदार पुलिस प्रशासन होगा।
बता दें कि आवास विकास ने राजेश गुप्ता और संगीता गुप्ता को सेक्टर 12 ए जगदीशपुरा में एक प्लॉट आवंटित किया था। आवास विकास के मुताबिक प्लाट पर राजकुमार नाम के व्यक्ति ने अवैध कब्जा कर लिया। आवास विकास के अधिकारियों ने वर्ष 2018 में राजकुमार के खिलाफ अवैध कब्जा किए जाने का जगदीशपुरा थाने में मुकदमा दर्ज कराया। विवेचना एसआई वीर सिंह को मिली। दरोगा ने चार्जशीट तो लगाई लेकिन उसमें लिखा कि संगीता गुप्ता पत्नी राजेश गुप्ता की मृत्यु हो चुकी है। राजेश गुप्ता को जब इस बात की जानकारी हुई कि उनकी पत्नी को मुर्दा दिखा दिया गया है तो वह अधिकारियों के सामने कई बार शिकायत लेकर पहुंचे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने पुलिस कमिश्नर से भी 10 मई को शिकायत की कि विवेचक वीर सिंह ने अभियुक्त से लाभित होकर उसके बताए अनुसार विवेचना में मूल आवंटी संगीता गुप्ता की मृत्यु होना दिखा दिया गया है। इससे उन्होंने विवेचना को दूषित कर दिया है। उन्होंने यह भी शिकायत की है कि अवैध कब्जा करने वाले राजकुमार ने अपनी पत्नी के नाम शकीला नाम की एक महिला से फर्जी रजिस्ट्री करा ली है।पुलिस कमिश्नर के द्वारा एसीपी लोहामंडी को मामले की जांच सौंप दी गई। तीन महीने से जांच पेंडिंग में चल रही है। दरोगा के द्वारा जिंदा को मुर्दा दिखाए जाने पर भी पुलिस कार्रवाई के लिए नींद से नहीं जाग रही है। फर्जी रजिस्ट्री कराए जाने पर भी दूसरी एफआईआर दर्ज नहीं कराई जा रही। जबकि आवास विकास के अधिकारियों ने भी बोल दिया है कि शकीला नाम की महिला आवंटी नहीं थी। राजकुमार ने फर्जी रजिस्ट्री कराई है। इधर पीड़ित और उनकी पत्नी ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में एक पत्र और दिया था जिसमें उन्होंने लिखा है कि वह काफी परेशान है उन्हें आत्महत्या करने के अलावा कोई मार्ग दिखाई नहीं दे रहा है। आरोपी के द्वारा उन्हें आए दिन धमकी भी दी जा रही हैं। अगर उनके परिवार को मजबूरन आत्महत्या जैसा निर्णय लेना पड़ता है तो इसके लिए पूर्ण रूप से स्थानीय पुलिस प्रशासन जिम्मेदार होगा।
दो बार पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर गए लेकिन कुछ नहीं किया
आवास विकास के अधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर और जिलाधिकारी को कब्जा मुक्त कराए जाने के लिए पत्र लिखा था। इसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम दो बार मौके पर गई है लेकिन वहां से कब्जा खाली कराए बिना लौट आई है। सूत्रों ने बताया है कि एक बार तो एक व्यक्ति बड़ी गाड़ी में आया था और एक पुलिस अधिकारी को गाड़ी में बैठाकर आगे ले गया जिसके बाद उसे पुलिस अधिकारी ने कहा कि आज हमारे पास महिला पुलिसकर्मी नहीं है। आवास विकास की टीम वापस हो गई। दूसरी बार में पुलिस ने आवास विकास अधिकारियों से कहा कि अगर आपने गेट का ताला तोड़ा तो आपके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो जाएगा। इसके बाद कब्जा नहीं हटवाया जा सका।
पीड़ित के पुलिस से सवाल
– जब संगीता गुप्ता जिंदा है तो विवेचक के खिलाफ अभी तक विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं की गई
2- आवास विकास ने अवैध कब्जे का मुकदमा दर्ज कराया था, उस पर चार्जशीट भी लगी है तो फर्जी रजिस्ट्री पर पुलिस दूसरी एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कर रही
– देवरिया में जमीन के मामले में हत्याएं होने के बाद भी आगरा कमिश्नरेट पुलिस जमीन के मामलों में कार्रवाई के लिए क्यों नहीं जाग रही है
– पुलिस जमीन को कब्जा मुक्त करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों के साथ दो बार मौके पर गई । आखिर किसके कहने पर वहां से वापस हुई?











