आगरा। आगरा कमिश्नरेट बनने के बाद पुलिस के कई निराले खेल देखने को मिल रहे हैं। नया मामला जगदीशपुरा थाने का आया है। पूर्व थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार और दरोगा मनोहर तोमर ने एक ही मामले में दो अलग-अलग रिपोर्ट दी हैं। पहली रिपोर्ट में उन्होंने जिसे आरोपी बनाया है, दूसरी रिपोर्ट में उसे सही बता पीड़ित बना दिया है। जो आरोपी बन रहा था अब वह पीड़ित बन गया है और जो पीड़ित बन रहा था वह आरोपी। नए थानाध्यक्ष भी एक मामले में दो आदेश देखकर अचंभित हो गए। उन्होंने नए आदेश पर मुकदमा दर्ज नहीं किया है। कल वह पुलिस कमिश्नर के पास सलाह लेने जाएंगे।
विशाल भारद्वाज निवासी शास्त्रीपुरम ने 13 अक्टूबर को पुलिस अपर आयुक्त को एक प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनका एक पूर्व परिचित भूपेंद्र सारस्वत प्रॉपर्टी का काम करता है। गौरव गुप्ता और शिव कुमार भी प्रॉपर्टी के काम में सहयोग करते हैं। हम लोग आपस में एक दूसरे के ग्राहकों को भी कमीशन पर संपत्ति खरीदवा देते हैं और कमीशन बांट लेते हैं। अक्टूबर 2022 में वह अपने मित्र आकाश के साथ भूपेंद्र के कार्यालय शास्त्रीपुरम पर गए थे। जहां पर भूपेंद्र ने सिकंदरा बोदला रोड पर अपनी जमीन को बताते हुए उसे बेचने की बात कही और खतौनी की नकल भी दिखाई। विशाल ने सोचा कि उनके पास मुख्य मार्ग की जमीन के भी ग्राहक आते रहते हैं। इसलिए विशाल जमीन खरीदने के लिए तैयार हो गए। विशाल भारद्वाज का कहना है कि उन्होंने 12 अक्टूबर को भूपेंद्र के घर जाकर पांच लाख रुपए नगद और दो दिन बाद 14 अक्टूबर को उनके खाते में एक लाख 70 हजार रुपए डाल दिए। कुछ दिनों बाद उन्हें किसी ने बताया कि इस जमीन का तो मालिक मर चुका है। इसके बाद उन्होंने भूपेंद्र द्वारा दी गई खतौनी की जांच कराई गई तो वह कूटरचित निकली। विशाल का आरोप है कि नकल में कूट रचना करके भूपेंद्र ने यह अपने नाम की बनाई थी और धोखा देते हुए 6 लाख 70 हजार रुपए ठग लिए। विशाल भारद्वाज का आरोप है कि भूपेंद्र और उसके साथी पूर्व में भी इस प्रकार की ठगी कर चुके हैं। वह पैसा मांगने पर फर्जी मुकदमे लिखवा कर उल्टा पैसा वसूलने की धमकी देते हैं। मामले में पुलिस अपर आयुक्त ने इस प्रार्थना पत्र पर जांच के आदेश दिए। दरोगा मनोहर तोमर ने अपनी जांच रिपोर्ट में आरोपों को सही पाया और एफआईआर दर्ज करने के लिए अनुमति मांगी। रिपोर्ट को थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने अग्रसारित कर दिया। एक नवंबर को पुलिस अपर आयुक्त ने एफआईआर दर्ज करने के लिए आदेश कर दिए, उनके आदेश थाने में पहुंच गए। बताया जा रहा है कि थाने से किसी ने इस बात की सूचना भूपेंद्र को दे दी कि आपके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो रहा है। इसके बाद भूपेंद्र ने एक प्रार्थना पत्र पुलिस अपर आयुक्त को दिया। इसमें उन्होंने कहा कि विशाल भारद्वाज ने जो शिकायत की है वह झूठी है। जो फर्जी खतौनी दिखाई गई है। वह विशाल भारद्वाज और उनके साथियों द्वारा ही कूटरचित व फर्जी तरीके से तैयार की गई है। इस बार जांच थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार को दी गई। मामले में थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने जांच कर विशाल भारद्वाज के खिलाफ एफआईआर की अनुमति मांगी है। अब पुलिस अपर आयुक्त ने विशाल भारद्वाज के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए आदेश दे दिए हैं। इधर थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार का तबादला हो गया है। अब कुशल पाल सिंह थानाध्यक्ष बन गए हैं। मंगलवार को जब उनके सामने पुलिस अपर आयुक्त का नया आदेश आया तो वह देखकर अचंभित हो गए। क्योंकि एक आदेश पहले भी आ चुका है। एक ही मामले में दो आदेश को देखकर उन्होंने एफआईआर दर्ज नहीं की। वह कल पुलिस कमिश्नर या एडिशनल पुलिस कमिश्नर से सलाह लेंगे कि इस मामले में क्या करना है।
पुलिस से हैं यह सवाल
1- विशाल भारद्वाज के प्रार्थना पत्र पर दरोगा मनोहर तोमर ने किस आधार पर आरोप सही पाए थे। आरोप सही नही थे तो तत्कालीन थानाध्यक्ष ने दरोगा की रिपोर्ट को उच्च अधिकारियों के लिए सबमिट कैसे कर दिया?
2- पुलिस अपर आयुक्त के एफआईआर दर्ज करने के आदेश को थाने से किसने लीक किया?
3- तत्कालीन थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार और दरोगा मनोहर तोमर ने पहली रिपोर्ट में विशाल भारद्वाज को सही माना है तो दूसरी में गलत क्यों?
4-तत्कालीन थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार और दरोगा मनोहर तोमर ने विशाल भारद्वाज की शिकायत पर पहली रिपोर्ट में पैसे के लेनदेन को सही माना है दूसरी में कैसे नकार दिया जबकि बैंक में ट्रांसफर होने का सबूत लगा है?
5- तत्कालीन थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार और दरोगा मनोहर तोमर ने एक ही मामले में दो अलग-अलग रिपोर्ट दी हैं। इस बात को लेकर दोनों की अभी तक प्रारंभिक जांच क्यों शुरू नहीं कराई गई है?











