आगरा। आगरा कमिश्नरेट में विवेचना में बड़े स्तर पर खेल हो रहे हैं। विवेचक घटना सही होने पर भी गैंगरेप की धारा हटा रहे हैं। इसके साथ ही विवेचकों द्वारा असली दोषियों को विवेचना में खेल कर बचाया जा रहा है। कुछ तो जिंदा लोगों को विवेचना में मुर्दा ही बना दे रहे हैं। खेल उजागर होने के बाद भी कार्रवाई में सख्ती दिखाने की जगह सुस्ती बरती जा रही है। सबसे ज्यादा हैरान कर देने वाली बात यह है कि एक ओर शासन के मिशन शक्ति को लेकर सख्त निर्देश हैं लेकिन आगरा पुलिस महिलाओं को न्याय दिलाने की जगह उनके साथ अन्याय कर रही है।
केस 1
ट्रांस यमुना थाना क्षेत्र की एक युवती गायब हो गई। परिजनों के द्वारा थाने में तहरीर दी गई तो काफी विलंब के बाद अपहरण की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ। इधर युवती ने चंगुल से मुक्त होने के बाद पुलिस को बताया कि टूंडला के एक होटल में उसके साथ गैंगरेप हुआ था। 164 के बयान में भी युवती ने गैंगरेप की बात कही। इसके बावजूद विवेचक के द्वारा ना घटनास्थल का निरीक्षण किया गया ना ही सीसीटीवी फुटेज चेक किए गए। आरोपियों को लाभ देते हुए मामूली धारा गाली गलौज, धमकी में चार्जशीट लगा दी। अपहरण और गैंगरेप की धारा हटा दी। पीड़िता एसीपी छत्ता से मिली। एसीपी ने जांच कराई तो सामने आया कि युवती को होटल में ले जाया गया था। सीडीआर निकलने पर भी आरोपियों की वहां लोकेशन होने की पुष्टि हो गई। उन्होंने विवेचक की फटकार लगाई। कहा की महिला संबंधी अपराधों का भी मजाक बना रखा है। एसीपी ने चार्जशीट वापस कर दी। सूत्रों की माने तो उन्होंने उच्च अधिकारियों को थानाध्यक्ष और विवेचक पर कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी है, लेकिन सात दिन बीत जाने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इधर सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि एक तरफ पुलिस अधिकारी क्राइम मीटिंग में बोल रहे हैं कि महिला संबंधी अपराधों को गंभीरता से लिया जाए और दूसरी तरफ गैंगरेप जैसी बड़ी धारा हटाकर आरोपियों की मदद की जा रही है। यह स्थिति तब है जब मिशन शक्ति अभियान बड़े स्तर पर चल रहा है। आगरा कमिश्नरेट में क्या मिशन शक्ति अभियान सिर्फ एक दिखावा है।
केस 2
कोतवाली थाना क्षेत्र में 26 जनवरी को टीला माईथान पर बड़ी घटना हुई थी। मलबे में दबकर एक मासूम की मौत हो गई थी। यहां पर धर्मशाला की जगह मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाई जा रही थी। बिल्डरों द्वारा जेसीबी चलाए जाने पर पुराने घरों की नींव हिल गई और पांच घर ढह गए थे। एक मकान के मलबे में दबकर मुकेश शर्मा की चार साल की बेटी रूशाली की मृत्यु हो गई थी। मामले में पुलिस ने धर्मशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष राजू मेहरा, बिल्डर हरेश शर्मा और राघवेंद्र उपाध्याय खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इधर मामले में adm सिटी ने डीसीपी सिटी को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि असली दोषियों को बचाने के प्रयास किया जा रहा है। इसलिए विवेचक को यह निर्देश दिए जाएं कि वह मामले में सही तरीके से जांच करें। बताया जा रहा है कि यह पत्र अधिकारियों ने हवा में उड़ा दिया। सात महीने में इसका उन्होंने कोई संज्ञान नहीं लिया। असली दोषी अभी भी बाहर खुले में घूम रहे हैं। आखिर उन्हें क्यों बचाया जा रहा है। यह सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि मामला एक बार फिर से सुर्खियों में आने के बाद विवेचना को दोबारा शुरू करने की बात कही जा रही है।
केस 3
एक व्यक्ति द्वारा अवैध कब्जा किए जाने पर जगदीशपुरा थाने में आवास विकास के अधिकारियों द्वारा उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। अवैध कब्जे को लेकर दर्ज हुए मुकदमे में विवेचक वीर सिंह ने आवंटी संगीता गुप्ता को मृतक दिखा दिया। पुलिस कमिश्नर के सामने पेश होकर महिला ने शिकायत की कि वह जिंदा है, फिर भी उसे मरा हुआ दिखा दिया है। पुलिस कमिश्नर के आदेश देने के बाद भी कई महीने तक जांच लंबित चलती रही। दरोगा को बचाया जाता रहा। मामला मीडिया में सुर्खियों में आने के बाद अब दरोगा की प्रारंभिक जांच शुरू कराई गई है। जब महिला पुलिस अधिकारियों के सामने खड़ी होकर बोल रही है कि वह जिंदा है तब भी पुलिस अधिकारियों ने उसकी बात को गंभीरता से क्यों नहीं लिया।
कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होने से पुलिस कर्मियों की कार्यशैली सवालों के घेरे में
आगरा। पिछले कुछ महीने में कई अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। शाहगंज में एक इंस्पेक्टर ने तीन लोगों को हवालात में रखकर उनकी पिटाई करा कर तहसील ले जाकर रजिस्ट्री कराई थी। सिर्फ लाइन हाजिर की ही कार्रवाई हुई। ट्रांस यमुना में एक व्यापारी की गुमशुदगी समय से नहीं लिखी गई। व्यापारी की हत्या हो गई। मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हुई। एक महिला दरोगा को लाइन हाजिर कर खानापूर्ति कर दी गई। कई ऐसे मामले हैं जिनमें बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। रिश्वत लिए जाने का मामला सिद्ध होने के बाद भी भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज नहीं कराया गया। इसके बाद पुलिसकर्मियों के हौसले और बढ़ गए हैं।











