-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। एक पीड़ित ने जगनेर थानाध्यक्ष पर अपने घर भेजकर गोबर डलवाने, शौचालय धुलवाने बंधक बनाने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। शिकायत के 24 घंटे के अंदर ही पीड़ित को सामान दिला दिया गया। इसके बाद पीड़ित से शपथपत्र लिखवाया गया। वीडियो बनाया गया कि उसे पुलिस से कोई शिकायत नहीं है। इसके बाद जांच पूरी हो गई। पूर्व में भी कई बड़े-बड़े मामले शपथ पत्र ने निपटा दिए हैं। यह मामला भी निपट गया। किस नियम के तहत पीड़ित को थानाध्यक्ष ने अपने गांव भेजा? एक महीना दो दिन रखा? किसके आदेश से पीड़ित को थाने पर रखा? बर्तन साफ कराए? कपड़े धुलवाए? गंभीर प्रकरण में उठे कई सवाल अनसुलझे रह गए।
अजीजपुर, धनौली (मलपुरा) निवासी शैलेंद्र उर्फ रिंकू बुधवार को पुलिस आयुक्त के समक्ष पेश हुआ था। आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष जगनेर अवनीत मान और छह पुलिस कर्मियों ने उसका मानसिक और शरीरिक उत्पीड़न किया है। 20 जुलाई को वह जगनेर थाने गया था। उसकी पत्नी एक किराए के मकान में सामान रखकर भाग गई थी। उसका सामान पुलिस को वापस कराना था। थानाध्यक्ष जगनेर ने उसे थाने पर रख लिया। थाने में उससे मजदूरों की तरह काम कराया। 18 अगस्त को थानाध्यक्ष ने अपने गांव बड़ौत (बागपत) भेज दिया। एक महीना दो दिन वह वहां कैद रहा। वहां उससे गोबर उठवाया गया। मारपीट की गई। जातिसूचक शब्द बोले गए। परेशान होने पर एक मुंशी उसे वापस लेकर आया। दोबारा थाने में रखकर मजदूरी कराई। पुलिस आयुक्त ने मामले की जांच एसीपी खेरागढ़ महेश कुमार को दी थी।
गुरुवार की सुबह पीड़ित का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। उसने अपने आरोपों का समर्थन किया। दोपहर को उसे एसीपी ने बुलाया, उससे बातचीत की, उसका सामान उसे वापस दिलाया गया। इसके बाद उससे शपथपत्र लिया गया। उसने लिखकर दिया कि पुलिस ने तो उसकी मदद की है। किसी ने कोई दुर्व्यवहार नहीं किया। बहकावे में आकर प्रार्थना पत्र दिया था। उसका सामान वापस मिल गया है।
क्या इन सवालों के जवाब खोजेंगे अधिकारी
-शैलेंद्र कितने दिन थाने में रहा। क्या काम किया। किसके आदेश से रहा।
-एसओ ने अपने गांव किसके आदेश से भेजा। एक महीना दो दिन उसने वहां क्या किया।
-20 जुलाई को पीड़ित अपना सामान वापस दिलाने की शिकायत लेकर आया था। आखिर ऐसा क्या हुआ जो 19 अक्तूबर को सामान वापस मिल गया। इससे पहले क्यों नहीं मिला।
-क्या सभी पीड़ितों की पुलिस इसी तरह काम देकर मदद करती है।
– बुधवार को उसने शिकायत की। गुरुवार सुबह वीडियो वायरल कर अपने आरोपों को सही बताया। एसीपी के पास जाते ही वह कैसे पलट गया।
शपथपत्र ने बचाए कई महारथी
पुलिस के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हिम्मत चाहिए। पीड़ित आवाज उठाते हैं। अधिकारी जिसे बचाना चाहते हैं उसे मौका दिया जाता है। वे शपथपत्र लेकर आता है। जिसके खिलाफ कार्रवाई करनी होती है तत्काल हो जाती है।
-सादाबाद के चांदी कारीगरों से चांदी लूटी गई। अवैध वसूली हुई। फाउंड्री नगर पुलिस चौकी के पुलिस कर्मी निलंबित हुए। शपथपत्र लेकर मुकदमे से बचे।
-अवैध हिरासत में रखकर शाहगंज थाने में बैनामा करारा गया। पीड़ित से शपथपत्र लिया गया।
-लोहामंडी का सिपाही रिश्वत लेते कैमरे में कैद हुआ। पीड़ित से शपथपत्र लेकर मुकदमे से बचा।











