आगरा। वृंदावन कॉरिडोर के लिए 510 करोड रुपए देने की इच्छा जाहिर कर सुर्खियां बटोरने वाले प्रखर गर्ग के खिलाफ हरीपर्वत थाने में 9 करोड रुपए की ठगी के आरोप में एफआईआर दर्ज हुई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद वह परिवार सहित घर छोड़कर फरार हो गए हैं।
ट्रांसपोर्ट नगर के रहने वाले अरुण सोंधी ने हरी पर्वत थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि अप्रैल 2018 में सेंट्रल बैंक रोड पर जी होटल का दूसरा और तीसरा फ्लोर खरीदने के लिए पांच करोड रुपए में प्रखर, सतीश गुप्ता, सुमित कुमार जैन, मुकेश कुमार जैन से डील हुई थी। पीड़ित ने 2.82 करोड रुपए नेफ्ट द्वारा दिए थे। जब रजिस्ट्री करने के लिए कहा तो आरोपियों ने कहा कि द्वारकापुरम कमला नगर की अपनी प्रॉपर्टी हमें बेच दो। उसका जो रुपया मिलेगा उसे जी होटल की संपत्ति में एडजस्ट कर लेंगे। इसके अलावा महेंद्र की ओर से दिए गए तीन फ्लैट के एक करोड रुपए भी जी होटल संपत्ति के पेमेंट में सम्मिलित कर लेंगे, उनके कहने पर द्वारका पुरम कमला नगर के भूतल और तृतीय तल के बेचने का सौदा 1.56 करोड रुपए में तय हुआ। 3 अगस्त 2019 को रजिस्ट्री कर दी गई। इसके बदले में जो चेक दिए थे वह बाउंस हो गए। पीड़ित का कहना है कि 2020 में उन्होंने एमजी रोड पर प्रखर गर्ग और उनके साथियों से एक बिल्डिंग में फर्स्ट फ्लोर खरीदा था। फ्लोर को फुली फर्निश कर 4.5 लाख रुपए किराया देने का एग्रीमेंट हुआ, लेकिन लंबे समय तक काम नहीं कराया गया। काफी समय गुजरने के बाद वह पैसे देने के लिए टालमटोल करते रहे। पीड़ित का कहना है कि प्रखर और उनकी पत्नी राखी पर 25 से ज्यादा धोखाधड़ी के मुकदमे चल रहे हैं। वह वर्ष 2022 में धोखाधड़ी के एक मामले में हरीपर्वत थाने से जेल भी जा चुके हैं।











