आगरा। पिनाहट क्षेत्र का एक गांव आज भी चारपाई, ट्यूब और अस्थायी सहारों के जरिए नदी पार करने को मजबूर होता हैं। इसके पीछे कारण यह है कि बाजार तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है। रास्ते की मांग को लेकर महिलाएं धरने पर बैठ गई हैं।
भारतीय किसान यूनियन जय हिंद के नेतृत्व में उटंगन नदी किनारे ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन लगातार जारी है। ग्राम पंचायत अरनोटा के गांव सुखलालपुरा में घूंघट की ओट में धरने पर बैठी महिलाओं ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता पर करारा प्रहार करते हुए कहा है कि अगर गांव में रास्ता होता तो हमारे बच्चे भी पढ़-लिखकर फादर और मदर बोलना सीखते। ग्रामीणों ने गांव के लिए पक्का मार्ग, उटंगन नदी पर पुल निर्माण और रेलवे अंडरपास बनाकर सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब एक हजार की आबादी वाला सुखलालपुरा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। गांव जंगल के बीच बसा हुआ है और बाजार तक पहुंचने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है। गांव के किनारे बह रही उटंगन नदी को ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पार करते हैं। धरना प्रदर्शन के दौरान नवविवाहिता सीमा पत्नी कालीचरण और कमला देवी पत्नी करन सिंह ने घूंघट की ओट से गांव की पीड़ा बयां की। महिलाओं ने कहा कि सड़क और पुल न होने के कारण बच्चे नियमित स्कूल नहीं जा पाते। जंगल के रास्तों और जंगली जानवरों के डर के बीच बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि गांव तक सड़क और नदी पर पुल बन जाए तो बच्चे भी पढ़-लिखकर समाज में आगे बढ़ सकेंगे। ग्राम प्रधान रामनिवास वर्मा ने साफ कहा कि जब तक ग्रामीणों की मांगें पूरी नहीं होंगी, धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की।











