-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। आगरा कमिश्नरेट के एक थाने के दरोगा और दो हेड कांस्टेबल को रात में ड्यूटी के दौरान खनन के दो ट्रैक्टर पकड़ना भारी पड़ गया। थाना प्रभारी की तरफ से शाबाशी मिलने की जगह यह सुनने को मिला कि यह ट्रैक्टर क्यों पकड़े, चलने देते। महज 207 में उन्हें सीज कराया गया। जबकि उनमें खनन की मिट्टी भी लदी थी। फिर भी रिपोर्ट में खनन का जिक्र नहीं किया गया। इतना ही नहीं नाइट करके लौटे तीनों पुलिस कर्मियों की सुबह आठ बजे से डे ड्यूटी और लगा दी गई। घटना थाने में चर्चा का विषय बनी हुई है। थाना प्रभारी की कार्यशैली से अच्छी कार्यशैली के सभी पुलिसकर्मी परेशान हैं।
मामला अछनेरा सर्किल के एक थाने का है। शनिवार को थाने में तैनात दरोगा और दो हेड कॉन्स्टेबल की नाइट ड्यूटी थी। पुलिस कर्मियों ने मिट्टी खनन में लिप्त दो ट्रैक्टर पकड़ लिए। ट्रैक्टर पकड़े जाने पर चालक ने बताया कि हमारे पास अनुमति है। पुलिसकर्मियों ने अनुमति दिखाने के लिए कहा तो वह बोला कि साहब थाना प्रभारी की तरफ से मौखिक अनुमति है। पुलिसकर्मियों को गुस्सा आ गया। वह उन्हें ट्रैक्टर ट्रॉली सहित थाने ले आए। थाने में मौजूद थाना प्रभारी के कारखास ने उन्हें इसकी जानकारी दे दी। थाना प्रभारी सुबह चार बजे अपने रूम से थाना परिसर में चले आए। ट्रैक्टर पकड़ने पर नाराज हुए। दरोगा और दोनों हेड कॉन्स्टेबल को हड़काया। पुलिस कर्मियों ने उनसे कहा साहब हमने तो अपनी ड्यूटी की है। थाना प्रभारी ने कहा कि आगे से ऐसी ड्यूटी मत करना। क्यों कि दोनों ट्रैक्टर थाने आ चुके थे। उन्हें 207 एमवी एक्ट में सीज करा दिया गया। रिपोर्ट में खनन का जिक्र नहीं किया गया। दरोगा और दोनों हेड कॉन्स्टेबल की सुबह छह बजे जीडी में वापसी हुई थी। सुबह आठ बजे से तीनों पुलिस कर्मियों की बार्डर की एक नहर पर डे ड्यूटी लगा दी गई। तीनों पुलिस कर्मी ड्यूटी करने गए। बताया जा रहा है कि शनिवार को दरोगा की डे ड्यूटी थी। उसके बावजूद नाइट लगाई गई। विवाद के बाद फिर डे लगा दी गई। दरोगा पिछले 36 घंटे से लगातार ड्यूटी कर रहा है।
चर्चित कारखास को थाने से हटाया
थाना प्रभारी के दो कारखास भी इन दिनों खासी चर्चाओं में है। पूर्व में कई शिकायतों में इनके नाम आए हैं। दो दिन पहले डीसीपी पश्चिम ने एक कारखास का थाने की एक चौकी पर स्थानांतरण कर दिया था। चौकी पर स्थानांतरण के बावजूद वह थाने में कारखासी कर रहा है।
चला रहे मनमर्जी
कमिश्नरेट में कई थाना प्रभारी ऐसे हैं जिनके खिलाफ आए दिन शिकायतें होती हैं। बड़े-बड़े मामले शपथ पत्र लेकर दबा दिए जाते हैं। जांच के नाम पर खानापूरी की जाती है। सवाल यह उठ रहा है कि भाजपा सरकार में ऐसे थाना प्रभारियों को किसकी शह मिली हुई है। जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट आदेश हैं कि बेदाग छवि वालों को थाने का प्रभारी बनाया जाए।
प्रभारी को देखकर आश्चर्यचकित हुए थे एक अधिकारी
बीते दिनों एक मामले में एक आईपीएस अधिकारी ने इन थाना प्रभारी को तलब किया था। जब वह अधिकारी के सामने पहुंचे और उनके एक भी सवाल का जवाब नहीं दे पाए तो उन्हें लगा कि प्रभारी की जगह कोई और आ गया है। अधिकारी ने कहा कि अपने थाने के प्रभारी को भेजना। थाना प्रभारी ने कहा कि साहब मैं ही प्रभारी हूं। यह सुनकर अधिकारी आश्चर्यचकित हो गए और इस सोच में पड़ गए कि इसे चार्ज कैसे मिल गया है। बता दें कि कई ऐसे थाना प्रभारी हैं जिनकी कार्यशैली सुर्खियों में छाई हुई है फिर भी वह चार्ज पर डटे हुए हैं। इनके अंदर कौन सी काबिलियत देखकर चार्ज दिया गया है यह सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक अन्य थाने में भी दरोगा को खनन का ट्रैक्टर पकड़ना पड़ा था भारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक बीते दिनों पश्चिमी सर्किल के ही एक अन्य थाने में एक दरोगा को खनन के ट्रैक्टर पकड़ना भारी पड़ा था। ट्रैक्टर पकड़ने पर थाना प्रभारी उससे नाराज हो गए थे, उससे मारपीट पर उतारू हो गए थे। जिन लोगों के ट्रैक्टर पकड़े थे उन्होंने भी पकड़ने के दौरान यही कहा था कि आपके थाना प्रभारी की अनुमति है। खनन माफिया का साथ देने पर दरोगा का गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया था। दरोगा ने थाना प्रभारी से कहा था कि हम तो अपनी जान पर खेल कर ट्रैक्टर पकड़ रहे हैं और आप खनन माफिया के हौसले बढ़ा रहे हैं। ऐसे तो आप किसी दिन हमें गोली पड़वा देंगे। थाना प्रभारी ने दरोगा की रिपोर्ट दे दी थी जिसके बाद उसका तबादला हो गया।











