आगरा। हरियाणा के समालखा स्थित माधव सृष्टि परिसर में तीन दिनों तक चली राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा रविवार को संपन्न हो गई। संघ के शताब्दी वर्ष के बीच आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक के अंतिम दिन संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कुछ प्रचारकों और प्रमुख पदाधिकारियों के दायित्वों में बदलाव किया गया है, जबकि संघ अपने पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे में भी बड़ा पुनर्गठन करने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।
सूत्रों से मिली प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक डॉ. हरीश रौतेला को पश्चिम उत्तर प्रदेश का क्षेत्र संपर्क प्रमुख बनाया गया है। अब तक वे पश्चिम उत्तर प्रदेश के सह संपर्क प्रमुख के रूप में दायित्व निभा रहे थे। इस बदलाव को पश्चिमी यूपी में संघ के संपर्क तंत्र को और अधिक सक्रिय तथा प्रभावी बनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। इसी क्रम में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के क्षेत्रीय संगठन मंत्री मनोज नीखरा को अब संघ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके साथ ही उन्हें एक विशेष और रणनीतिक जिम्मेदारी भी सौंपी गई है, नेपाल से सटे जिलों में नेपाली समाज के बीच संघ कार्य के विस्तार का दायित्व। माना जा रहा है कि सीमावर्ती जिलों में सामाजिक-सांस्कृतिक संपर्क, संगठन विस्तार और वैचारिक पहुंच को मजबूत करने के लिहाज से यह जिम्मेदारी काफी अहम है। बैठक से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में से एक संघ के संगठनात्मक ढांचे में संभावित बड़ा परिवर्तन भी रहा। संघ अब ‘प्रांत प्रचारक’ व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर ‘संभाग प्रचारक’ मॉडल की ओर बढ़ रहा है। यानी अब बड़े प्रांतों के बजाय छोटे और अधिक कार्यक्षम संभागीय ढांचे के जरिए संगठन को जमीनी स्तर तक अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करने की योजना है। इस बदलाव का उद्देश्य निर्णय प्रक्रिया को तेज करना, नेतृत्व और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच दूरी कम करना, क्षेत्रीय चुनौतियों के अनुसार त्वरित प्रतिक्रिया, सीमावर्ती, संवेदनशील और सामाजिक रूप से विशेष क्षेत्रों पर केंद्रित विस्तार बताया जा रहा है।











