आगरा। पेशेवर अपराधियों से निपटने के लिए बनाई गई स्वॉट (स्पेशल वेपन एंड टेक्टिक्स) टीम के दो सिपाहियों में जमकर लात और घूंसे चल गए। एक सिपाही ने तो दूसरे पर पिस्टल तान दी। मामला अधिकारियों तक पहुंचाने के बाद स्वाट टीम भंग कर दी गई है। फिलहाल उन सिपाहियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है, जिनके बीच मारपीट हुई थी। मारपीट के पीछे दो वजह चर्चाओं में हैं।
बता दें कि स्वाट नाम से आगरा में पहली टीम वर्ष 2011 में तत्कालीन एसएसपी असीम अरुण ने बनाई थी। टीम में शामिल दरोगा और सिपाहियों को स्पेशल कमांडो ट्रेनिंग दिलाई गई थी। टीम की ड्रेस बनी थी। काले कपड़ों में टीम के जवान अलग ही नजर आते थे। जिस मकसद से स्वाट का गठन हुआ था। टीम धीरे-धीरे उससे भटक गई। इस बार विवाद ज्यादा ही बढ़ गया। पुलिस सूत्रों की मानें तो ताजगंज थाने के एक वांछित की घेराबंदी के लिए स्वाट टीम को लगाया गया था। दीवानी में टीम के जवान सादा कपड़ों में तैनात थे। वहां एक सिपाही की गलती से उनकी पहचान हो गई। सिपाही ने एक अधिवक्ता को बता दिया कि वह किसे पकड़ने आए हैं। इधर पैरोकारों ने बदमाश को थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया। स्वाट के एक सिपाही ने उस बदमाश को थाना पुलिस से छीनने का प्रयास किया। इसी बात पर टीम में तैनात दो सिपाहियों के बीच विवाद हुआ। यह विवाद स्वाट कार्यालय तक पहुंच गया। चर्चा है कि दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई। दोनों ने एक दूसरे के कपड़े फाड़ दिए। एक सिपाही ने पिस्टल निकाल ली। पिस्टल तानने वाला सिपाही पूर्व में एत्मादुद्दौला थाने में भी सुर्खियों में रहा है। दोनों के बीच हुए झगड़े की जानकारी पुलिस आयुक्त तक पहुंची तो उन्होंने जांच बैठा दी है। पुलिस सूत्रों का कहना है उन्हें भी विवाद की असली वजह नहीं बताई गई। विवाद के पीछे एक वजह और बताई जा रही है। हालांकि कोई अधिकारी इसकी पुष्टि करने को तैयार नहीं है। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों भारी मात्रा में गांजा पकड़ा गया था। उसमें खेल हुआ था। मुखबिर के हिस्से के नाम पर माल कम कर दिया गया। भारी मात्रा में गांजा बाहर बेच दिया गया है। करीब नौ कुंतल गांजा पकड़ा गया और दिखाया बहुत कम गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि करीब 400 किलोमीटर दूर से यह लाया गया था। अधिकारियों को भी टोपी पहना दी गई।
चहेता गुडवर्क है गांजा पकड़ना
जो काम अब स्वॉट कर रही है। पूर्व में सर्विलांस करती थी। गांजा पकड़ना पिछले कुछ सालों से स्पेशल टीम का चहेता गुडवर्क है। पूर्व में भी गुडवर्क के बाद कई तरह के आरोप टीम पर लगे थे। आगरा तक कमिश्नरेट नहीं बना था। जोन और रेंज स्तर से तत्कालीन एसएसपी को मौखिक रूप से गांजा गुडवर्क में हुए खेल की जानकारी दी गई थी। आगरा में जांच कार्रवाई के लिए नहीं कराई जाती। पुलिस वाले फंस रहे होते हैं। इसलिए जांच में लीपापोती कर दी जाती है। गांजा जब भी पकड़ा जाता है मुखबिर को उसका हिस्सा देने के नाम पर खेल किया जाता है। सवाल यह उठता है कि मुखबिर के नाम पर जो गांजा निकाला जाता है। आखिर वह जाता कहां है। मुखबिर को गांजा दिया जाता है तो वह उसका क्या करता है। किसी अधिकारी ने यह जानने का प्रयास नहीं किया।











