आगरा। सावन के दूसरे सोमवार पर शुरू होने वाली ऐतिहासिक परिक्रमा में हजारों की संख्या में शिव भक्त भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए परिक्रमा पूर्ण करने के लिए निकल रहे हैं। जिला प्रशासन ने परिक्रमा से पहले सड़कों पर मौजूद गड्ढे और साफ-सफाई की व्यवस्था के दावे किए थे। जब इसकी पड़ताल की तो कई जगह सड़कें खुदी हुई मिली। इधर जगह-जगह पर भंडारे का आयोजन हो रहा है। बल्केश्वर, दयालबाग, कमला नगर, ब्रज विहार आदि जगहों पर कई विशाल भंडारे देखने को मिल रहे हैं।
आगरा में कई सालों से करीब 40 किलोमीटर की ऐतिहासिक परिक्रमा सावन के दूसरे सोमवार से पहले पड़ने वाले रविवार शाम से शुरू की जाती है। इस परिक्रमा में हजारों की संख्या में शिव भक्त नंगे पांव भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए शामिल होते हैं। रविवार शाम से शुरू होने वाली यह परिक्रमा सोमवार सुबह करीब 8 बजे तक संपन्न होती है। आगरा की परिक्रमा में सभी उम्र के शिव भक्त शामिल होते हैं। जिसमें छोटे बच्चे, किशोर, युवा और बुजुर्ग भी भोलेनाथ के जयकारे लगाते हुए इस परिक्रमा को पूर्ण करते हैं। नंगे पाव लगने वाली परिक्रमा में भक्तजनों के सामने खराब रास्ते की, बरसात की और कांटों की कई परेशानियां आड़े आती है। लेकिन भोलेनाथ की भक्ति में झूमते हुए बम भोले के जयकारे लगाते हुए और नाचते गाते हुए यह भक्त 12 से 13 घंटे में परिक्रमा को पूर्ण कर लेते हैं। आगरा के बलकेश्वर मंदिर से यह परिक्रमा शुरू होती है। जिसके बाद शिवभक्त ताजगंज होते हुए राजेश्वर मंदिर उसके बाद रावली महादेव, पृथ्वीनाथ और फिर सिकंदरा क्षेत्र में स्थित कैलाश महादेव मंदिर पहुंचते हैं। यहां से बबूल के जंगलों में स्थित बनखंडी महादेव होते हुए बलकेश्वर महादेव मंदिर पर अपनी परिक्रमा संपन्न करते हैं।











