नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस पार्टी अपना घर दुरुस्त करने में लग गई है साथ ही आगे के लिए भी रोडमैप तैयार किया जा रहा है। चिंतन शिविर के दौरान कई मुद्दे उठे और उसके बाद पार्टी अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। चिंतन शिविर के बाद कांग्रेस हाइकमान ने बड़ा फैसला करते हुए तीन नई टीमें बनाई हैं। इसमें राजनीतिक मामलों पर विचार करने के लिए एक टीम, दूसरी टास्क फोर्स-2024 और तीसरा समूह भारत जोड़ो आंदोलन पर काम करेगा। अलग-अलग टीम में पार्टी के सीनियर और नए नेता शामिल हैं। हालांकि इसमें चर्चा एक ऐसे नाम की हो रही है जिससे कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता भी पूरी तरह वाकिफ नहीं। वो नाम है सुनील कोनगोलु का जो चुनावी रणनीतिकार हैं। चुनावी रणनीतिकार का नाम आते ही प्रशांत किशोर का नाम ऊपर आता है। खैर यहां भी कनेक्शन प्रशांत किशोर पीके से है। सुनील कोनगोलु चुनावी रणनीतिकार पीके के पुराने सहयोगी हैं। प्रशांत किशोर कांग्रेस में भले ही नहीं आए लेकिन सुनील कोनगोलु अब कांग्रेस में हैं।
2024 लोकसभा चुनाव के लिए जो टास्क फोर्स बनाया गया है उसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम, मुकुल वासनिक, जयराम रमेश, के.सी. वेणुगोपाल, अजय माकन, प्रियंका गांधी, रणदीप सुरजेवाला, सुनील कोनगोलु को शामिल किया गया है। टास्क फोर्स के हर सदस्य को संगठन, संचार और मीडिया, वित्त और चुनाव प्रबंधन से संबंधित जिम्मेदारी मिली है। कांग्रेस में सुनील कोनगोलु की एंट्री साथी चुनाव रणनीतिकार पीके और कांग्रेस के बीच बातचीत टूटने के बाद हुई। कुछ लोगों को यह भी पता नहीं था कि क्या वह कांग्रेस के सदस्य हैं भी या नहीं इसके जवाब में पार्टी के प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा हां वह कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं।
सुनील कोनगोलु जिनकी सोशल मीडिया पर उपस्थिति न के बराबर है और कहा जाता है कि पीके के विपरीत वह एक मायावी व्यक्ति हैं। उनके तौर-तरीके भी काफी अलग हैं। प्रशांत किशोर और सुनील कोनगोलु अलग होने से पहले दोनों ने 2014 में साथ काम किया था। इस साल की शुरूआत में कांग्रेस ने अगले साल होने वाले कर्नाटक राज्य विधानसभा चुनाव के लिए चुनावों के लिए सुनील कोनगोलु की कंपनी माइंड शेयर एनालिटिक्स की सेवाएं लीं। पिछले कुछ समय से सुनील कोनगोलु को जानने वाले एक शख्स के अनुसार वह अपनी सीमा जानते हैं। वह अपने संबंधों का दिखावा नहीं करते। वह किसी पर हावी होने की कोशिश नहीं करते और सफलता का श्रेय नहीं लेना चाहते। वह हमेशा बैकग्राउंड में रहना पसंद करते हैं। कहा जाता है कि वह अपने विचारों को पार्टी पर नहीं थोपते।











