आगरा। जगदीशपुरा में करोड़ों रुपए की जमीन पर कब्जा कराने के लिए दो फर्जी मुकदमे लिख पांच निर्दोष लोगों को जेल भेजने वाले थानाध्यक्ष को बुधवार को पुलिस ने गुपचुप तरीके से पकड़कर जेल भेज दिया है। थानाध्यक्ष की पूछताछ में पूरा ठीकरा पुरुषोत्तम पहलवान पर फोड़ दिया गया है। पुलिस ने थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार का चालान भी आपराधिक षड्यंत्र की धारा में किया है।
बता दें कि बोदला-जगदीशपुरा मार्ग पर बीएस कॉम्पलेक्स के पास दस हजार वर्ग गज जमीन पर जगदीशपुरा थाना पुलिस ने कब्जा कराने के लिए दो फर्जी मुकदमे लिखे। इनमें पुरुषों व महिलाओं को जेल भेज दिया। पहला मुकदमा 26 अगस्त 2023 को एनडीपीएस एक्ट का लिखा गया। पुलिस ने मौके से रवि कुशवाह, संकरिया और जटपुरा निवासी ओमप्रकाश को पकड़ा। मौके से एक वाहन बरामद दिखा। उसकी नंबर प्लेट फर्जी बताई गई। पुलिस ने टिर्री की नंबर प्लेट स्कूटर पर लगा दी। तीन पैकेट से नौ किलोग्राम गांजा बरामद दर्शाया गया। तीनों आरोपियों को जेल भेजा गया। नौ अक्तूबर को उसी जगह आबकारी निरीक्षक ने छापा मारा। मौके पर रह रहीं पूनम और उसकी ननद पुष्पा व फुरकान को पकड़ा। जगदीशपुरा थाने में आबकारी अधिनियम का मुकदमा लिखा गया। धोखाधड़ी की धाराएं भी लगाई गईं। तीनों को जेल भेजा गया। इसके बाद पुलिस ने वहां पर कब्जा करा दिया। मामले में डीजीपी से शिकायत होने के बाद एक एसपी जांच के लिए आए थे। एसपी के आने के बाद आगरा कमिश्नरेट के अधिकारियों के पसीने छूट गए। पुलिस आयुक्त ने तत्कालीन एसओ जगदीशपुरा जितेंद्र कुमार, मुख्य आरक्षी उपेंद्र मिश्रा, शिवराज सिंह व आरक्षी रविकांत को निलंबित कर दिया। पीड़ित की तहरीर पर थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार, एक बिल्डर और उनके बेटे तथा अन्य अज्ञात 18 लोगों के खिलाफ डकैती सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। थानाध्यक्ष ने रवि कुशवाहा के रिश्तेदार को पीएल पैलेस होटल में बुलाकर धमकी दी थी। इस मामले में भी हरीपर्वत थाने में उसके और बिल्डर के खिलाफ धमकी की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने अभी तक सिर्फ एक गुर्गे अमित अग्रवाल को जेल भेजा था। उस पर पीड़ित परिवार को धमकाने का आरोप था। थानाध्यक्ष और बिल्डर फरार थे। बुधवार को थानाध्यक्ष को पकड़ा गया लेकिन उसे गुपचुप तरीके से जेल भेज दिया गया।
डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि जगदीशपुरा पुलिस ने एसओ जितेंद्र कुमार को बुधवार की सुबह 11 बजे आवास विकास कालोनी से पकड़ा था। उससे पूछताछ की गई। उसने बताया कि उसे लगातार भूखंड पर अवैध गतिविधि की सूचना मिल रही थी। पुरुषोत्तम पहलवान पुलिस को सूचना दे रहा था। उन्हें उस समय साजिश की जानकारी नहीं थी। एक वीडियो भी गांजा बेचने का वायरल हुआ था। पुलिस ने दबिश दी तो मौके पर गांजा मिला। वहां गांजा किसने रखा यह जांच का विषय है। बाद में महिलाओं को इसी तरह शराब की सूचना पर आबकारी विभाग की टीम ने पकड़ा था। उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि पूरा खेल जमीन पर कब्जे के लिए खेला जा रहा है। पुलिस ने अपना गुडवर्क किया था। पुलिस ने उससे पूछा कि जब पांच लोग जेल चले गए तो जमीन पर बाउंड्री कैसे हो गई। जब बाउंड्री हो रही थी उस समय पुलिस कहां थी। इस सवाल के जवाब में थानाध्यक्ष ने कहा कि किसी ने कोई शिकायत नहीं की थी। इसलिए उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं हुई।
थानाध्यक्ष द्वारा तैनाती कराने वाले गुरु का नाम बताने की भी चर्चाएं
जितेंद्र कुमार पिनाहट थाने से लाइन हाजिर हुआ था। रुनकता पर तैनाती के दौरान सांप्रदायिक बवाल हुआ था। जितेंद्र कुमार को निलंबित किया गया। उसकी विभागीय जांच हुई। उसमें उसे क्या सजा मिली। जांच अधिकारी कौन था। आज तक किसी को नहीं पता। इसके बाद उसे खंदौली में टोल प्लाजा चौकी पर तैनाती मिली। यहां से वह बरहन थाने में एसएसआई बनकर गया। कुछ समय ही वहां रहा और सीधे पहले थाने के रूप में जगदीशपुरा थाने का थाना प्रभारी बनाया गया। उसकी तैनाती में जिस गुरु का योगदान रहता था वह उसने बता दिया है। गुरू का नाम सुर्खियों में छाया हुआ है। चर्चाएं हैं कि गुरु ने जितेंद्र जैसे कई लोगों को थाना प्रभारी बनवाया है। हालांकि अधिकारी कुछ बताने को तैयार नहीं हैं। मगर चर्चा है कि उसने एक नाम लिया है।
पहलवान और थानाध्यक्ष के आपस में थे संपर्क
पुलिस की जांच में यह भी निकल कर आया है कि जमीन पर कब्जे से पहले थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार और पुरुषोत्तम पहलवान आपस में संपर्क में थे। जितेंद्र कुमार ने खुद यह कबूल किया है। पुरुषोत्तम पहलवान के कहने पर एक बार नहीं दो बार दबिश दी गई। एसओ जितेंद्र कुमार ने पुलिस को बताया कि बिल्डर से उसकी पहले से कोई मुलाकात नहीं थी। दिसंबर में लखनऊ से जांच टीम आई थी। पीएसी गेस्ट हाउस में बुलाया था। वहां उसकी बिल्डर से पहली बार मुलाकात हुई थी। जब यह मामला तूल पकड़ने लगा तो उसे लगा कि कहीं फंस नहीं जाए। रवि कुशवाह परिवार की ओर से धर्मेंद्र वर्मा नाम का युवक पैरवी कर रहा था। धर्मेंद्र वर्मा ने उससे कहा था कि बिल्डर से एक मीटिंग करा दो। यह मामला खत्म हो सकता है। उसके कहने पर वह होटल पीएल पैलेस में गया था। वहां भी किसी को नहीं धमकाया था।
इन सवालों के जवाब नहीं मिले
– पुलिस एक मोटरसाइकिल चोर पकड़ने पर भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करती है। जितेंद्र को पकड़ने पर प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की?
– थानाध्यक्ष की तैनाती चर्चित ने जगदीशपुरा थाने में ही क्यों कराई? इस थाने में करोड़ों की जमीन पर कब्जा होना था।
-जमीन पर रहने वाले रवि कुशवाह का परिवार आपराधिक प्रवृत्ति का था तो वहां पहलवान की सूचना से पहले कभी दबिश क्यों नहीं दी गई थी?
-वहां शराब और गांजे का काम होता था तो थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी और बीट के सिपाही को पहले पता क्यों नहीं चला?
– थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार खेल में शामिल नहीं था तो मुकदमा लिखने से पहले ही शहर से क्यों भाग गया था?
-जगदीशपुरा थाने में तैनाती के दौरान थानाध्यक्ष ने जो भी गुडवर्क किए उन सब पर सवाल क्यों नहीं उठे। सिर्फ जमीन वाले मामले में ही पुलिस की छीछालेदर क्यों हुई।
-पुरुषोत्तम पहलवान एसओ के संपर्क में कब आया। दोनों को किसने मिलवाया। पहले से नहीं जानता था कि एकाएक मुखबिर क्यों बना लिया।











