आगरा। जगदीशपुरा में करोड़ों रुपए की जमीन पर कब्जा होने के मामले में भाजपा के अंदर ही राजनीति गर्मा गई है। मामले में कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और सांसद राजकुमार चाहर दोनों ही अप्रत्यक्ष रूप से एक दूसरे के ऊपर निशाना साध रहे हैं। मंगलवार को सांसद राजकुमार चाहर ने मंत्री योगेंद्र उपाध्याय द्वारा उनके ऊपर निशाना साधने पर पत्रकारों के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन पर आरोप लगाए गए हैं कि सैफई के सपा परिवार से जुड़े मनोज यादव से उनके तार जुड़े हैं। यह सरासर गलत है। वह किसी मनोज यादव नाम के व्यक्ति को न तो जानते हैं और न आज तक मिले हैं। उन्होंने जांच एजेंसियों से इस मामले की जांच करने की बात कही और दो-टूक शब्दों में कहा कि अगर उनकी तनिक भी इसमें संबद्धता नजर आएगी तो वह अपने राजनैतिक जीवन से संन्यास ले लेंगे।
जमीन पर कब्जे के मामले में कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और उनके बेटे का नाम आ रहा था। सोमवार को मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने पत्रकार वार्ता कर कहा कि उनका इस मामले से कोई भी लेना-देना नहीं है। वहीं वह इस बात पर जोर देते हुए नजर आए कि जमीन नेमीचंद जैन की है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सांसद राजकुमार चाहर पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनकी सीट जा रही है इसलिए वह यह सब कर रहे हैं। सोमवार को कैबिनेट मंत्री को अप्रत्यक्ष रूप से हमला बोलते देख मंगलवार को प्रतापपुरा स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से वार्ता करते हुए सांसद राजकुमार चाहर ने प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय की ओर से लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह माननीय जनप्रतिनिधि की ओर से दी गई इस चुनौती को भी स्वीकार करते हैं कि विवादित जमीन की पूरी जांच होनी चाहिए और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाना चाहिए। राजकुमार चाहर ने कहा कि उनकी पृष्ठभूमि साधारण परिवार की रही है और उनके पिता रेलवे में चौकीदार थे। इसलिए एक चौकीदार की पीड़ा का उन्हें अहसास हुआ और वे और उनका परिवार पीड़ित चौकीदार से मिलने गए और उसके लिए न्याय की मांग की थी। उन्होंने कहा, “मुझे यह भी नहीं मालूम है कि मामले में कौन लोग शामिल हैं। कमल चौधरी को मैं ऐसे ही जानता हूं जैसे आप या अन्य लोग जानते हैं। मेरा उद्देश्य पीड़ित व्यक्ति के साथ चट्टान की तरह खड़ा होना और उसे न्याय दिलाना है।










