आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज के प्लास्टिक सर्जरी एवं नाक कान गले विभाग द्वारा जटिल सर्जरी की गई है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बताया कि नाक, कान, गला विभाग के सह आचार्य डॉ. अखिल प्रताप सिंह द्वारा कैंसर ग्रसित जबड़े को हटाया गया, उसके बाद प्लास्टिक सर्जरी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. प्रणय सिंह चकोटिया द्वारा मरीज के जबड़े का पुनर्निर्माण किया गया। एनेस्थीसिया विभाग की सहायक आचार्य डॉ. अर्पिता सक्सेना द्वारा एनेस्थीसिया दिया गया जो कि इस तरह के ऑपरेशन में एक कठिन कार्य होता है। जबड़े के पुनर्निर्माण के लिए दाएं पैर की हड्डी का उपयोग किया गया। पैर की हड्डी को सबसे पहले जबड़े के आकार में लाया गया और उसके बाद उस हड्डी मैं खून का प्रवाह स्थापित करने के लिए उसे गर्दन की नसों से माइक्रोवस्कुलर विधि द्वारा दोबारा जोड़ा गया। इस तरह की सर्जरी को फ्री टिशू ट्रांसफर अथवा फ्री फिबुला फ्लैप रिकंस्ट्रक्शन भी कहा जाता है। इस तरह से कैंसर रिकंस्ट्रक्शन करने से मरीज को जल्दी रेडिएशन थेरेपी एवं अन्य थेरेपी दी जा सकती है और इस सर्जरी को करने से मरीज के चेहरे पर किसी भी तरह की विकृति नहीं होती जोकि अक्सर कैंसर ग्रसित जबड़ा निकालने पर देखी जाती है।
मुंह के कैंसर के कारण
मुंह के कैंसर का सबसे बड़ा कारण तंबाकू का सेवन है। चबाने वाले तंबाकू का उपयोग विभिन्न रूप में किया जाता है जैसे कि खैनी, पान मसाला आदि। तंबाकू धूम्रपान के रूप में भी किया जाता है। जैसे कि बीड़ी, हुक्का, सिगरेट आदि के इस्तेमाल से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। तंबाकू वाले मंजन के इस्तेमाल से भी कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। तंबाकू और शराब दोनों का एक साथ सेवन करने से कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। नुकीले दांत से बार-बार गाल में चोट लगने से भी कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए नियमित रूप से मुंह की जांच करवाना अति आवश्यक है। तंबाकू, शराब आदि का इस्तेमाल नहीं करके व नियमित जीवनशैली अपनाकर, खाने में पौष्टिक आहार का सेवन करके व योग, नियमित व्यायाम करके मुंह के कैंसर से बचा जा सकता है।
गॉल ब्लैडर कैंसर का भी सफल आपरेशन
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग द्वारा पित्त की थैली के कैंसर का ऑपरेशन दूरबीन विधि द्वारा सफलतापूर्वक किया गया।
एसएन मेडिकल कॉलेज में 50 साल की उम्र की महिला को पेट में दर्द के बाद गैस्ट्रो सर्जरी विभाग द्वारा जांच करवाने के बाद पित्त की थेली के कैंसर के बारे में पता चला। महिला को गैस्ट्रोसर्जरी विभाग में भर्ती किया गया। पूरा ऑपरेशन दूरबीन विधि द्वारा किया गया। इस कैंसर के ऑपरेशन में पित्त की थेली के साथ लिवर का थोड़ा हिस्सा भी निकाला जाता है। ऑपरेशन की शाम से ही मरीज़ का खाना पीना शुरू कर दिया गया। ऑपरेशन के चौथे दिन मरीज की छुट्टी कर दी गई। अभी तक इस तरह से तीन ऑपरेशन किए जा चुके हैं। ऑपरेशन टीम में गैस्ट्रोसर्गरी विभाग से डॉ. सचिन अरोड़ा, डॉ. रोहित धवन, डॉ. चंदन , डॉ. कौशल, डॉ. सोहम एवं एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. राजीव पुरी और उनकी टीम का सहयोग रहा।











