आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय के द्वारा नैक को गुमराह कर फर्जी डाटा देकर निरीक्षण कराया जा रहा है। ऐसे निरीक्षण का क्या औचित्य है। यह सवाल सिविल सोसाइटी के द्वारा पत्रकार वार्ता कर उठाए गए हैं।
बता दें कि विश्वविद्यालय में गुरुवार से सात सदस्यीय नैक टीम निरीक्षण करेगी। टीम के सदस्य बुधवार शाम तक आगरा पहुंच गए हैं। वह एक निजी होटल में रुके हुए हैं। बुधवार को सिविल सोसाइटी ऑफ आगरा के सचिव अनिल शर्मा ने हरियाली वाटिका में एक पत्रकार वार्ता की। सचिव अनिल शर्मा ने दावा किया कि विश्वविद्यालय ने 207 फैकल्टी मेंबर्स की जो लिस्ट साझा की है उसमें फर्जी जानकारी दी गई है। 207 में से सिर्फ 36 शिक्षक ही स्थाई हैं। 65 संविदा और 82 अतिथि प्रवक्ता हैं। 24 शिक्षक ऐसे हैं जो विश्वविद्यालय में काम ही नहीं करते हैं। अतिथि प्रवक्ताओं की संख्या सबसे ज्यादा है, जबकि अतिथि प्रवक्ताओं को विश्वविद्यालय प्रति घंटा के हिसाब से हिसाब करता है। वह स्थाई नहीं माने जाते हैं। अनिल शर्मा का कहना है कि विश्वविद्यालय के हालात बद से बदत्तर हैं। यहां प्रवेश, परीक्षा और परिणाम तीनों की ही स्थिति खराब है। छात्रों को ना ही रिजल्ट समय से मिल रहे हैं और ना ही मार्कशीट। स्थिति यह है कि विश्वविद्यालय परीक्षा भी समय पर नहीं करा पा रहा है। अधिकारियों का ध्यान सिर्फ कंस्ट्रक्शन पर है जबकि उनकी कोई आवश्यकता नहीं है।
अनिल शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय में सालों से सीनेट प्रभावी ही नहीं है, जबकि किसी भी विश्वविद्यालय में सबसे मजबूत सीनेट को माना जाता है। विश्वविद्यालय की समस्याओं, धांधली, फर्जीवाड़े को लेकर सिविल सोसाइटी ने नैक टीम को एक शिकायत भी भेजी है। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति प्रदेश के अधिकांश विश्वविद्यालयों में प्रभावशाली ढंग से लागू की जा रही है और उनके शिक्षास्तर में भी काफी बदलाव आया है, लेकिन लगता है कि डा. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय प्रशासन को इस संबंध में कोई परवाह नहीं है। स्तरीय शिक्षा के लिये आगरा के छात्रों को अन्य शिक्षा परिसरों में जाना पड़ रहा है। श्री शर्मा ने कहा कि महामहिम से भी अनुरोध है कि विश्वविद्यालय उच्च एनएएसी ग्रेडिंग/रेटिंग हासिल करने के लिए भ्रामक और तुच्छ जानकारी (fake and frivolous information ) प्रस्तुत कर रहा है। विश्वविद्यालय के प्रति भावनात्मक लगाव और उसके स्तर में अनवरत तरक्की की कामना रखने वाले नागरिक और पूर्व छात्रों के रूप में हम यह समझने में विफल हैं कि तथ्यात्मक गलत जानकारियां देकर अगर उच्च एनएएसी रेटिंग / ग्रेडिंग ( NAAC Rating / Grading ) विश्वविद्यालय को मिल भी जाती है तो वह उसके प्रशासन में कैसे बदलाव लाएगी और हितधारकों को इससे कैसे लाभ होगा।
ग्रेडिंग अपग्रेड करने को विश्वविद्यालय तंत्र जो तौर तरीके अपना रहा है वह सरकारी धन और व्यवस्था के दुरुपयोग से अधिक कुछ भी नहीं है। इस प्रकार की ग्रेडिंग से विश्वविद्यालय और छात्रों का कोई भला नहीं होने वाला। विश्वविद्यालय में कितनी अनियमित्ताये हैं और मनमानी का दौर किस प्रकार चल रहा है, इस पर बहुत कुछ कहा जा सकता है। श्री शर्मा ने कहा कि इस प्रकार अपेक्षा की जाती है कि वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं और छात्र हितधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए नाक की ग्रेडिंग / रेटिंग (NAAC grading / rating) कार्यवाही सुधारों के बाद फिर से शुरू करें। यदि, नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) उच्च ग्रेडिंग / रेटिंग अभी प्रदान करती है, तो यह विश्वविद्यालय की अनियमितताओं और कुप्रबंधन का महिमामंडन करना होगा। पत्रकार वार्ता में शिरोमणि सिंह, राजीव सक्सेना और असलम सलीमी उपस्थित रहे।
पूर्व कर्मचारी ने भी की थी शिकायत, एसएसआर रिपोर्ट फर्जी होने के लगाए थे आरोप
आगरा। विश्वविद्यालय के एक पूर्व कर्मचारी वीरेश कुमार ने भी पिछले दिनों नैक चैयरमेन को शिकायत की थी कि विश्वविद्यालय के द्वारा जो एसएसआर रिपोर्ट दाखिल की गई है, वह फर्जी है। उसमें पूरे तरीके से गुमराह किया गया है। कई तथ्य फर्जी दर्शाए गए हैं। जांच होने पर इनकी सच्चाई सामने आ सकती है। सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट को लेकर कुछ लोग हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर रहे हैं।











