आगरा। सिकंदरा में पुलिस की दबिश के दौरान अधिवक्ता की हुई मौत के मामले में आठ पुलिसकर्मी घटना वाली रात से ही छुट्टी पर चल रहे हैं। जब वह गलत नहीं है तो छुट्टी पर क्यों चले गए हैं। यह सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच के लिए गठित एसआईटी भी अभी तक परिजनों को कई सवालों के जवाब नहीं दे पाई है। मुकदमे में पुलिस क्या करेगी। यह सवाल परिजन पूछ रहे हैं।
एक मार्च की रात न्यू आगरा पुलिस ने सिकंदरा क्षेत्र स्थित मंगलम आधार अपार्टमेंट में दबिश दी थी। दबिश के दौरान संदिग्ध हालात में अधिवक्ता सुनील शर्मा ऊपर से गिरे थे। उनकी मौत हो गई थी। उनकी पत्नी ने हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। मुकदमे में तत्कालीन थानाध्यक्ष न्यू आगरा राजीव कुमार, पूर्व चौकी प्रभारी दयालबाग अनुराग सिंह नामजद हैं। आठ-दस अज्ञात पुलिस कर्मियों का जिक्र है। पुलिस के अपार्टमेंट में जाने और बाहर निकलने के सीसीटीवी फुटेज हैं। घटना से अधिवक्ताओं में आक्रोश है। कई दिन अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे। उनकी मांग पर एसआईटी का गठन किया गया। सीबीसीआईडी जांच की संस्तुति करते हुए शासन को पत्र लिखा गया है। सांसद राजकुमार चाहर ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। विवेचना फिलहाल इंस्पेक्टर सिकंदरा नीरज कुमार शर्मा के पास है।
गुरुवार को भी अधिवक्ता के परिजन पुलिस आयुक्त जे रविन्दर गौड से मिले। परिजन पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। वे एक ही बात बोल रहे हैं कि अभी तक गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई है? अभी तक पुलिस ने इस मामले में कुछ क्यों नहीं किया है। पुलिस आयुक्त ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया कि जांच जारी है। साक्ष्य संकलन के आधार पर पुलिस इस मामले में कार्रवाई करेगी।
वहीं कानून के जानकारों का कहना है कि यह मुकदमा पुलिस के गले की फांस बन गया है। दबिश के सीसीटीवी फुटेज हैं। वीडियो भी है। पुलिस ने दबिश के दौरान दरवाजा तोड़ा था। अधिवक्ता का एनबीडब्ल्यू तक नहीं लिया गया था। दबिश सूर्यास्त के बाद दी गई थी। दबिश में गई टीम इतनी आसानी से कानूनी शिकंजे से बच नहीं पाएगी। पुलिस पहले दिन बोल रही थी कि यह हादसा है। हादसा मानकर भी विवेचना की गई तो पुलिस कर्मी फंस जाएंगे। अधिवक्ता की मौत हुई है। पोस्टमार्टम हुआ है। अधिवक्ता समाज पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है। पुलिस विवेचना में गड़बड़ी करेगी तो अधिवक्ता आरोपित पुलिस कर्मियों को कोर्ट में तलब कराएंगे।











