आगरा। यमुना नदी का जलस्तर मंगलवार सुबह लो फ्लड लेवल से सवा दो फीट ऊपर पहुंच गया है। इस वजह से बेलनगंज, दयालबाग, एत्माउद्दौला, फाउंड्री नगर, दयालबाग, बलकेश्वर सहित कई क्षेत्र जल मग्न हो गए हैं। फाउंड्री नगर में तो एक मकान ही ढह गया है।
आगरा में यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। यह चिंता का विषय बना हुआ है। सोमवार को महालक्ष्मी मंदिर के पीछे की दीवार गिरने पर कई लोगों के गिरने की सूचना ने भी हड़कंप मचा दिया था। बेलनगंज क्षेत्र में भी कल ही पानी पहुंच गया था, जिसके कारण सेक्सरिया कॉलेज की छुट्टी करनी पड़ी थी। कल से आज तक यह और बढ़ चुका है। बेलनगंज में विभिन्न इलाकों की सड़कों पर भरते पानी की वजह टैप किए हुए नालों का ओवरफ्लो होना है। हाथी घाट पर भी पानी भर चुका है। भैंरो पार्क गली तक पानी पहुंच चुका है। मंगलवार सुबह 8 बजे वाटर वर्क्स, आगरा पर गेज रीडिंग 152.805 मीटर दर्ज की गई। यह स्तर खतरे के निशान 152.400 मीटर से ऊपर है। यमुना का उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) 154.760 मीटर है। वर्तमान में जलस्तर एक सेंटीमीटर प्रति घंटे बढ़ रहा है।
ताजमहल को छूकर बह रही है यमुना, दशहरा घाट डूबा
ताजमहल के पार्श्व में स्थित गार्डन पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। यमुना ताजमहल की दीवार को छूकर बह रही है। बसई घाट स्थित ताजमहल की उत्तर-पश्चिमी बुर्जी के बराबर से पानी बाग खान-ए-आलम में पहुंच गया है। यहां जल स्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। दशहरा घाट पूरी तरह जलमग्न हो गया है। इस तरफ किसी को जाने नहीं दिया जा रहा है।
1837 में बना था यमुना किनारा रोड
यमुना वर्ष 1837 से पूर्व तक आगरा किला को छूकर बहती थी। वर्ष 1837 में यमुना किनारा रोड बनाया गया था। आस्ट्रियाई इतिहासकार ईबा कोच ने अपनी किताब ‘द कंप्लीट ताजमहल एंड दि रिवरफ्रंट गार्डंस आफ आगरा’ में वर्ष 1837 में राहत कार्य के रूप में यमुना किनारा रोड बनवाने का जिक्र किया है। तब इसे स्ट्रेंड रोड के रूप में जाना जाता था। इससे पूर्व यमुना के दोनों किनारों पर उद्यान व हवेलियां बनी हुई थीं। वर्ष 1666 में शाहजहां की मृत्यु होने पर आगरा किला से ताजमहल तक उसके शव को नाव में रखकर ले जाया गया था।
यमुना किनारे थमे वाहनों के पहिया
यमुना के जलस्तर ने बढ़ते-बढ़ते यमुना किनारा रोड के आवागमन को पहले ही प्रभावित कर दिया था लेकिन सोमवार को भी इससे राहत नहीं मिली। हालांकि काली देवी मंदिर के पास पुल के नीचे हुए जलभराव को यमुना में गिरते नालों में रेत के बोरे लगाकर टैप कर दिया, जिससे वहां की जलभराव की समस्या दूर हो गई। लेकिन कामाख्या देवी मंदिर के पास स्थित तिराहा पर नालों से होते हुए यमुना जल जमा होने से भारी जलभराव हो गया।
ताजगंज मोक्षधाम और विद्युत शवदाह गृह का रास्ता बंद
यमुना नदी में बाढ़ आने से ताजगंज मोक्षधाम और विद्युत शवदाह गृह का रास्ता बंद हो गया है जिससे अंतिम संस्कार प्रभावित हुए हैं। श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी ने असमर्थता जताई है। जलस्तर बढ़ने से फाउंड्रीनगर घाट भी प्रभावित है। अब मलका का चबूतरा शाहगंज आवास विकास कॉलोनी सेक्टर तीन और चावली मधुनगर में अंतिम संस्कार हो रहे हैं।











