आगरा। बिहार में फिर एक बड़ा खेला होने जा रहा है, जिसकी धमक पूरे देश में सुनाई देगी। अभी तो कयासबाजियों का दौर है। लेकिन इसके बारे में जानना जरूरी है। पिछले 30 मार्च को नीतीश कुमार ने पटना के कुछ बड़े पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहा कि वह चारों धाम की यात्रा नहीं कर पाए हैं। चारों धाम में लोकसभा, राज्यसभा, विधान सभा और विधान परिषद हैं। नीतीश कुमार लोकसभा, विधान सभा, विधान परिषद के लिए तो निर्वाचित हो चुके हैं लेकिन वह कभी राज्यसभा में नहीं पहुंच पाए, जबकि उनके मित्र और प्रतिद्वंद्वी लालू प्रसाद यादव चारों धाम की यात्रा कर चुके हैं। वैसे उनके मित्र सुशील कुमार मोदी भी चारों धाम घूम चुके हैं। ऐसे में नीतीश कुमार भी चाहते हैं कि वह भी एक बार राज्यसभा जरूर पहुंचें और अपनी इस इच्छा से उन्होंने अपने घर पर मौजूद खास पत्रकारों से जिक्र कर दिया है।
स्वाभाविक है कि उनका इतना कहना भर था कि तमाम तरह की अटकलें तेज हो गईं। भाजपा के हलकों में भी इस बात की चर्चा है कि यदि वास्तव में नीतीश कुमार राज्यसभा जाते हैं तो फिर बिहार में बीजेपी का ही मुख्यमंत्री होगा और जदयू के दो विधायकों को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा। इसमें फायदा भाजपा को भी है और जदयू को भी। भाजपा अभी विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी है। उसके 77 विधायक हैं। दूसरी ओर ऐसी भी चर्चा है कि नीतीश कुमार को उपराष्ट्रपति का पद दिया जा सकता है। कयासबाजियों को मानें तो भाजपा को इसका बड़ा फायदा होगा। बिहार में आज तक भाजपा का कोई मुख्यमंत्री नहीं बना है। ऐसे में पहली बार भाजपा का कोई नेता बिहार का मुख्यमंत्री होगा और दूसरा नीतीश कुमार का कुर्मी, कोइरी वोट बैंक पूरी तरह से भाजपा के पक्ष में खड़ा हो जाएगा। यही कारण है कि भाजपा के तमाम कद्दावर नेताओं को दरकिनार कर भाजपा नीतीश कुमार को उपराष्ट्रपति का पद दे सकती है। हालांकि इसके लिए जरूरी नहीं है कि वह व्यक्ति राज्यसभा का सदस्य हो। दूसरे राज्यसभा के 70 सांसदों की विदाई दो दिन पहले ही हो चुकी है। इसलिए राज्यसभा में नए सांसदों के आने की राह भी खुल गई है।
भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में जिन लोगों को गिना जाता है, उनमें नित्यानंद राय सबसे पहले हैं। वह यादव हैं और यादवों के साथ ही समाज के अन्य वर्गों का वोट भी उन्हें लगातार मिलता रहा है। दूसरे नंबर पर गिरिराज सिंह हैं, जो भूमिहार हैं और भूमिहार चाहते हैं कि डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के बाद अब गिरिराज सिंह मुख्यमंत्री बनें। ऐसे में देखना यह है कि नीतीश कुमार और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में क्या फाइनल होता है और ऊंट कौन सा करवट लेता है।
इस बीच गृह मंत्री अमित शाह कल पटना पहुंच रहे हैं। जाहिर है कि ऐसे माहौल में अमित शाह की मुलाकात नीतीश कुमार से भी होगी और भाजपा विधानमंडल दल के सदस्यों के साथ ही बिहार भाजपा के बड़े नेताओं से भी वह राय-मशविरा करेंगे। लेकिन जदयू के नेता जहां इसे अफवाह कह रहे हैं, वहीं भाजपा के नेता मानते हैं कि नीतीश कुमार दिल्ली शिफ्ट हो सकते हैं। राजद का कहना है कि नीतीश कुमार कुर्सी कुमार हैं और यदि उन्हें दिल्ली में उपराष्ट्रपति का पद मिलता है तो वह बिहार को त्याग कर दिल्ली जाना जरूर चाहेंगे।
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