लखनऊ/आगरा। आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीड़ा) ने बड़ा कदम उठाया है। सर्दियों के दौरान अब इस एक्सप्रेसवे पर रात 12 बजे से सुबह 8 बजे तक वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किमी से घटाकर 75 किमी प्रति घंटा कर दी जाएगी। यह वही सीमा होगी जो यमुना एक्सप्रेसवे पर पहले से लागू है।
यूपीड़ा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी दीपक कुमार (आईएएस) की अध्यक्षता में लखनऊ पिकअप भवन में हुई समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण देते हुए कई ठोस सुझाव रखे, जिन पर प्राधिकरण ने सहमति जताई।
एक्सप्रेसवे पर होने वाली हर दुर्घटना की ड्रोन कैमरे से रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सके। इसके साथ ही यूपीड़ा ने यह भी निर्णय लिया है कि एक्सप्रेसवे का नया रोड सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा। पिछला ऑडिट वर्ष 2019 में सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) द्वारा किया गया था। यातायात की मौजूदा स्थिति में भारी बदलाव को देखते हुए आईआईटी दिल्ली या सीआरआरआई जैसी स्वतंत्र संस्था से नया ऑडिट कराया जाएगा।
हादसों के आंकड़े और कारण
वर्ष 2021 से 2025 के बीच आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 7,024 सड़क दुर्घटनाएँ दर्ज की गईं। इनमें 811 लोगों की मौत हुई, जबकि 8,355 घायल हुए। रिपोर्ट के अनुसार 54.7 प्रतिशत हादसे ड्राइवर की झपकी या थकान के कारण हुए। यूपीड़ा का लक्ष्य अब केवल गति नहीं, बल्कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। अधिवक्ता जैन ने कहा कि केवल तेज़ी को प्रगति नहीं कहा जा सकता, असली प्रगति सुरक्षा में है। आगरा–लखनऊ एक्सप्रेसवे को ‘मौत का गलियारा’ नहीं, बल्कि ‘जीवन का मार्ग’ बनाना होगा।










