आगरा। रविवार को पुलिस और सत्संगियों के बीच में हुए टकराव के बाद सोमवार को एक महिला डीसीपी सिटी से मिलने पहुंची। महिला ने खुद के सत्संगी होने का दावा किया। महिला ने सत्संगियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस से बचने को छोटी-छोटी बच्चियों को विवाद में आगे कर दिया जाता है। सत्संगियों से महिला ने अपनी जान को भी खतरा बताया। उसने मुकदमा दर्ज करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया।
दयालबाग निवासी महिला रूही सत्संगी सोमवार सुबह डीसीपी सूरज राय से मिलने पहुंची। महिला ने बताया कि वह गाजियाबाद की रहने वाली है। दो साल से आगरा के दयालबाग में रह रही है। वो राधास्वामी मत की अनुयायी है। इस साल 23 फरवरी को उस पर उसकी मां पर जानलेवा हमला हुआ था। हमला सत्संग सभा से जुडे़ लोगों ने किया था। उसने आरोप लगाया कि हमला करने का कारण था कि उसने सत्संग सभा की सेकेट्री पद के लिए नामांकन कर दिया था। ऐसे में वो लोग नहीं चाहते थे कि वो सभा की कार्यकारिणी के चुनाव में खड़ी हो। उस पर नामांकन वापस लेने का दवाब बनाया गया। महिला ने सत्संग सभा की सुरक्षा में तैनात एक अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए। कहा कि पदाधिकारी सत्संग सभा में अपना गैंग बनाकर काम करते हैं। गुरु महाराज के पास किसी को जाने नहीं दिया जाता, जिससे कोई उनकी हकीकत न बता दें। बच्चे और उनके परिजनों की धार्मिक भावनाओं का प्रयोग कर इनके द्वारा छोटी-छोटी बच्चियों को सुरक्षा के नाम पर ग्रामीण और पुलिस के आगे ढाल बनाया जाता है। रविवार को भी ऐसा ही किया गया था। महिला ने आरोप लगाया कि सभा की आरएएफ को अलीगढ़ या राजा बरारी में ले जाकर आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने वालों से हथियार चलाने की ट्रेनिंग दिलाई जाती है। कोड वर्ड में बात की जाती है। लाठी कहते ही लड़कियां टूट पड़ती हैं। चाहे किसी की जान चली जाए। इसके अलावा घाड़ी भरती कर लो कोड बोलते ही गाड़ी में आग लगाना होता है।
सत्संग सभा के मीडिया प्रभारी एसके नैयर का कहना है कि महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। आरोप बेबुनियाद हैं। वह सत्संग में कई महिलाओं को नुकसान पहुंचा चुकी है। चाकू से हमला किया था। इसके अलावा कई बार गाड़ियों पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश कर चुकी है।











