आगरा। आगरा पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन संगठित साइबर गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। इस संयुक्त ऑपरेशन में ताजगंज से 24, जगदीशपुरा से 6 और किरावली से 2 आरोपियों सहित कुल 32 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। इस कार्रवाई में 100 से अधिक पुलिसकर्मी अलग-अलग टीमों में शामिल रहे।
एडिशनल सीपी सिटी आदित्य कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि इन तीनों गिरोहों के खिलाफ पूरे देश में 500 से अधिक शिकायतें दर्ज थीं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बीते 5 वर्षों में 300 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी की गई है। ठगी की रकम को भारत से दुबई स्थित बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह का सरगना नितिन भगौर दुबई में बैठकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा है। उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। इस संयुक्त कार्रवाई में अब तक करीब 600 बैंक खातों को सीज किया जा चुका है। एडीसीपी ने बताया कि एनसीआरपी (NCRP) पोर्टल पर साइबर फ्रॉड और बैंक खातों के दुरुपयोग को लेकर बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज थीं। एक मामले में 15 जून 2025 को शिकायतकर्ता एटीएम से रुपये निकाल रहा था, तभी एक व्यक्ति ने उससे 3600 रुपये नकद मांगे और बदले में ऑनलाइन ट्रांसफर किया। कुछ समय बाद पीड़ित का खाता होल्ड हो गया। जांच में सामने आया कि उसके खाते में साइबर फ्रॉड के 36 हजार रुपये आए थे। इस केस की जांच में किरावली निवासी ऋषि का नाम सामने आया, जिसके लिंक खातों पर 54 शिकायतें दर्ज थीं। आगे की गोपनीय जांच में नितिन भगौर के नेतृत्व में संगठित साइबर गिरोह के संचालन का खुलासा हुआ। पुलिस ने 13 दिसंबर को ताजगंज से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनसे पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए। आरोपियों ने बताया कि वे डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी, व्हाट्सएप व टेलीग्राम पर फर्जी यूपीआई लिंक भेजकर फ्रॉड, गूगल पर विज्ञापन चलाकर और क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर लोगों से ठगी करते थे। पुलिस को आरोपियों के पास से कई फर्जी आधार कार्ड भी मिले। जांच में सामने आया कि नितिन भगौर और उसका साथी रवि राठौर ने ‘मेडलर सर्विसेज ग्रुप’ नाम से एक बोगस कंपनी बनाई थी, जिसके खातों में साइबर फ्रॉड की रकम मंगाई जाती थी। इस गैंग के 9 आरोपी अभी फरार हैं। इसी क्रम में थाना शाहगंज पुलिस ने लोन के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह के 6 सदस्यों को भी गिरफ्तार किया है। यह गिरोह सोशल मीडिया पर मोबीक्विक लोन ऐप का प्रचार करता था। लोन के इच्छुक लोगों से मोबाइल नंबर लेकर ऐप डाउनलोड कराते, 5 हजार रुपये फीस के नाम पर जमा कराते और 50 हजार रुपये का लोन तुरंत स्वीकृत करने का झांसा देते थे। बाद में ओटीपी हासिल कर वॉलेट से रकम निकाल ली जाती थी। यह गिरोह राजस्थान से संचालित हो रहा था। एडीसीपी आदित्य कुमार ने बताया कि पूछताछ में सामने आया कि आरोपी फर्जी आधार कार्ड बनवाने के लिए जनसेवा केंद्रों का इस्तेमाल करते थे। सिकंदरा क्षेत्र के पनवारी निवासी जनसेवा केंद्र संचालक पवन कुमार को भी गिरफ्तार किया गया है। कई अन्य जनसेवा केंद्र संचालक पुलिस के रडार पर हैं।











