-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। सोमवार रात को मुख्यमंत्री के द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कानून व्यवस्था पर अब तक की सबसे बड़ी बैठक बुलाई गई थी। बैठक में उन्होंने आगरा में दयालबाग की घटना को लेकर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने दो टूक कहा कि उच्च अधिकारी मौके पर नहीं गए और उन्होंने कोई संवाद भी नहीं किया। इसलिए यह घटना घटित हुई। इधर मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि दागी चेहरों को थानाध्यक्ष नहीं बनाया जाए। यह सुनकर ईमानदार और उन पुलिसकर्मियों के चेहरे खिल गए हैं जिनके पास कोई सिफारिश नहीं है लेकिन वे साफ छवि के हैं। सूत्रों की मानें तो आगरा में कई चेहरे ऐसे चार्ज पा गए हैं जो दागी हैं, उन पर थाने भी नहीं चल रहे हैं। एसीपी से लेकर डीसीपी उन्हें झेल रहे हैं। क्या मुख्यमंत्री के कहने के बाद उन्हें हटाया जाएगा। यह सवाल खड़े हो रहे हैं।
बता दें क सोमवार रात को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी की कानून व्यवस्था को लेकर बड़ी बैठक की। जिलों के SSP, SP, पुलिस कमिश्नर वीसी के जरिए जुड़े। यूपी के 1579 थाना प्रभारी, 438 DSP, 176 ASP, GRP अधिकारी भी जुड़े। सबसे ज्यादा मुख्यमंत्री आगरा, हापुड़ और सुल्तानपुर में हुई घटना को लेकर नाराज हुए।
आगरा में दयालबाग में हुई घटना को लेकर उन्होंने कहा कि घटना निंदनीय है। उच्च अधिकारियों ने लखनऊ को भी अवगत नहीं कराया। उच्च अधिकारी मौके पर भी नहीं गए और ना ही उन्होंने कोई संवाद किया। इसलिए यह घटना घटित हो गई। मुख्यमंत्री के यह कहने के बाद आगरा के अधिकारियों के पसीने छूट गए। क्योंकि उनकी बात में सच्चाई थी। उच्च अधिकारी मौके पर नहीं गए थे, जिस वजह से छोटे अधिकारी मौके पर कोई सही फैसला नहीं ले पाए। पुलिस पर पथराव भी हो गया और पुलिस मुकदमा भी दर्ज नहीं कर पा रही है। उल्टा उसके फंसने की नौबत आ गई है। कमिश्नरेट में मजिस्ट्रेट एसीपी होता है। इसलिए एसीपी की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इधर मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि साफ छवि के चेहरों को ही थानाध्यक्ष बनाया जाए। आगरा की बात करें तो पुलिस सूत्रों का कहना है कि कई दागी छवि के चेहरे थानाध्यक्ष बने हुए हैं। 5 से 6 साल की नौकरी में ही उन्हें कई दंड मिल चुके हैं। दो से तीन बार निलंबित और लाइन हाजिर हो चुके हैं। फिर भी उन्हें थाना प्रभारी बना दिया गया है। जबकि साफ छवि वाले चेहरों की कमी नहीं है। आलम यह है कि जो खनन क्षेत्र से खनन के मामले को लेकर हटा था उसे फिर से तैनाती मिल रही है। वही एक थाना अध्यक्ष तो ऐसे हैं जो किसी का फोन नहीं उठाते हैं। जब अधिकारी उनसे पूछते हैं कि वह फोन क्यों नहीं उठाते हैं तो वह कहते हैं कि अधिकारी, जनता, पत्रकार फोन रिकॉर्ड करते हैं। इसलिए मैं फोन नहीं उठाता हूं। यह जवाब सुनकर अधिकारी भी उनके ऊपर अंदर ही अंदर हंसते हैं और सोचते हैं कि यह चार्ज कैसे पा गया है। अधिकारी बोलते हैं कि हमारा तो फोन उठाया करो फिर भी थाना अध्यक्ष पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। अधिकारी ने थाना अध्यक्ष से यह भी कहा कि आप सही बात कीजिए कोई क्यों रिकॉर्ड करेगा।
आगरा में स्थिति यह है कि बड़े थानों में नए-नए दरोगा तैनात कर दिए गए हैं। पूर्व में वहां पर सीनियर इंस्पेक्टर तैनात रहे हैं। नए दरोगा को चार्ज मिलने के बाद उनके बैच के थाने में मौजूद दरोगा उनका कोई सम्मान नहीं करते। ना कोई आदेश मानते हैं। वहीं वह यह भी देखते हैं कि पूर्व में यह दागी रहा है। इन सभी बातों से थाना चलाने में कठिनाई आती है। आगरा में कई ऐसे चेहरों को चार्ज मिला हुआ है जो चार्ज चलाने के लायक ही नहीं हैं। एसीपी को चार्ज चलाना पड़ रहा है। एक उच्च अधिकारी भी इस बात को जानते हैं कि कई गलत चेहरे चार्ज पाए हुए हैं लेकिन वह चाहते हुए कुछ नहीं कर पा रहे हैं। खराब प्रदर्शन करने वाले 10 सर्किल के नाम भी बताए गए जिसमें आगरा कमिश्नरेट का फतेहाबाद सर्किल शामिल था। इधर मुख्यमंत्री ने यह भी कहा है कि महिला थाना प्रभारी के अलावा एक अन्य थाने में भी महिला को थाना अध्यक्ष बनाया जाए।











