आगरा। आगरा कमिश्नरेट में सुबह 9:30 और 10:00 बजे के बीच थाना प्रभारी की लोकेशन लेने के लिए पुलिस कमिश्नर के सीयूजी नंबर से आने वाले फोन ने सभी थाना प्रभारी को राइट टाइम कर दिया है। 10:00 बजे तक वह अपने ऑफिस में बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं। फरियादी भी उन्हें समय से आता देखकर अचंभित हैं। अभी तक यह देखने को मिल रहा था कि फरियादी उनका घंटों इंतजार करते थे। अब थाना प्रभारी फरियादियों का इंतजार करते हुए देखे जा रहे हैं।
पुलिस कमिश्नर जे रविन्द्र गौड के सख्त निर्देश हैं कि सभी थाना प्रभारी 10:00 बजे से लेकर 2:00 तक जनसुनवाई करें। वह भी करेक्ट 10:00 बजे अपनी ऑफिस में जनसुनवाई के लिए पहुंच जाते हैं। यही अपेक्षा वह हर थाना प्रभारी से करते हैं। हर रोज उनके यहां से सुबह 9:30 बजे से थाना प्रभारी के पास फोन आना शुरू हो जाता है कि आपकी क्या लोकेशन है। आप ऑफिस में बैठे या नहीं। अगर नहीं बैठे हैं तो क्यों नहीं बैठे हैं। रोजाना सुबह फोन आता देखकर और पुलिस कमिश्नर कहीं उन्हें चार्ज से हटा ना दें इस डर से थाना प्रभारी 10:00 बजे कुर्सी पर बैठना शुरू हो गए हैं। हालांकि कई को बैठने में कष्ट भी हो रहा है। क्योंकि उनकी आदत में 10 बजे तो उठने का अलार्म था। छत्ता सर्किल में एक प्रभारी 1:00 बजे आते थे और 2:00 बजे घर चले जाते थे। डे और नाईट ऑफिसर के हवाले थाना चल रहा था। चर्चा है कि वह एक घंटे भी हिसाब किताब के लिए आते थे। अब उन्होंने भी अपना घर छोड़कर थाने में क्वार्टर में ही रहना शुरू कर दिया है। रात में भी वह घर नहीं जा रहे हैं। डर लगता है कि साहब ना आ जाएं।
सिपाही को बनाया उसकी बीट का थानेदार
पुलिस कमिश्नर के द्वारा सिपाही को उसकी बीट का थानेदार बना दिया गया है। सत्यापन से लेकर वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी में बीट कांस्टेबल अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। हिस्ट्रीशीटर की निगरानी की जिम्मेदारी भी उन्हें दी गई है। बीट कांस्टेबल का लोगों के प्रति व्यवहार कैसा है इस बात की भी फीडबैक सेल द्वारा समय-समय पर जानकारी की जाएगी। अगर उनकी शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी।
जुआ, सट्टा में मिली संलिप्तता तो पुलिस कर्मी जाएंगे जेल, इस मैसेज के बाद धर पकड़ शुरू
अभी तक पूरे जिले में किसी भी थाने में जुआ और सट्टा थाना प्रभारी को दिखाई नहीं दे रहा था। नवागत पुलिस कमिश्नर की ओर से इन्हें पकड़ने के लिए कड़े निर्देश दिए गए। उन्होंने पुलिसकर्मियों को वायरलेस कराया है कि थाना प्रभारी से लेकर कांस्टेबल तक यह मैसेज होना चाहिए कि उनके क्षेत्र में जुआ और सट्टा से संबंधित गतिविधि नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा होना पाया जाता है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अगर पुलिसकर्मी संलिप्त पाए जाते हैं तो उन्हें जेल भी हो सकती है। यह मैसेज आने के बाद अब तक 50 से ऊपर जुआरी और सटोरिए पकड़ लिए गए हैं। जगदीशपुरा में सालों से बड़ा जुआ चल रहा था। वह भी पकड़ लिया गया है। सूत्रों का कहना है कि कुछ थाना प्रभारी तो छोटी मछलियों को पकड़कर ही नंबर बढ़ा रहे हैं। बड़ी मछलियों को जेल नहीं भेज रहे हैं। क्योंकि वह उनकी कमाई का जरिया हैं। उनको लग रहा है साहब को उनके बारे में पता नहीं चलेगा, लेकिन वह यह जानते नहीं है साहब का सूचना तंत्र बहुत तेज है। कुछ तो यह सोचकर अवैध खनन करा रहे हैं कि कुछ होगा नहीं। लेकिन वह अभी जानते नहीं है साहब की पकड़ में आने पर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है।
क्या हटेंगे चर्चित से जुड़े थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी
विभाग में अच्छे पुलिसकर्मियों के बीच में एक चर्चा सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है कि क्या चर्चित से जुड़े थाना प्रभारी और चौकी प्रभारी को हटाया जाएगा।पुलिसकर्मियों के बीच में चर्चा सुनने को मिल रही है कि 15 से 20 थाना प्रभारी और 30 से 38 चौकी प्रभारी चर्चित से जुड़े हुए हैं। वह चर्चित के कहने पर उल्टे को सीधा और सीधे को उल्टा कर देते हैं। जितने वह विभाग के अधिकारियों के प्रति वफादार नहीं है, उतने चर्चित के लिए हैं। अब इस बात में कितनी सच्चाई है। यह बात या तो चर्चित जानता है या उससे जुड़े पुलिसकर्मी।
पुलिस कर्मियों का मनोबल बढ़ाने और काम लेने में माहिर हैं नवागत पुलिस कमिश्नर
पुलिस कर्मियों का मनोबल बढ़ाने और उनसे काम लेने में पुलिस कमिश्नर को माहिर माना जाता है। पूर्व के उनके कार्यकाल के बारे में पता चला है कि वह खुद ही रोजाना होमवर्क देते हैं। किसी दिन होमवर्क देंगे कि आज वांछित को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा। किसी दिन होमवर्क मिलेगा की आज प्रार्थना पत्रों का निस्तारण होगा। किसी दिन होमवर्क मिलेगा आज विवेचना का निस्तारण होगा। भ्रष्टाचार वह कतई बर्दाश्त नहीं करते हैं। इसी वजह से उन्हें मुख्यमंत्री भी अपनी गुड बुक में रखे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने आगरा में उन्हें विशेष टास्क देकर भेजा है ऐसी चर्चाएं हैं। आगरा में ट्रैफिक पर भी वह काम करेंगे। ऐसा उनके मंसूबों को देखकर पता चल रहा है। वह राजनीतिक दबाव बिल्कुल नहीं मानते हैं। ऐसा पूर्व में देखने को मिल चुका है।











