आगरा। जगदीशपुरा में करोड़ों रुपये की जमीन पर कब्जे के मामले में मकान में से डकैती डालकर ट्रैक्टर ट्राली में जो किशोर बघेल सामान भरकर ले गया था वह जगदीशपुरा थाने से एक मुकदमे में वांछित था। उसके खिलाफ बलवे का मुकदमा लिखा गया था। पकड़े गए पहलवान से पूछताछ में उसका नाम सामने आने के बाद डकैती के मुकदमे में उसका नाम बढ़ाया गया है।
करीब 50 करोड़ रुपये की चार बीघा जमीन पर कब्जा कराने के लिए पुलिस ने दो फर्जी मुकदमे दर्ज कर पांच निर्दोष लोगों को जेल भेजा था। डीजीपी से शिकायत के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष सहित कई पुलिसकर्मी निलंबित किए गए। पुलिस ने जमीन की कथित मालकिन उमा देवी की तहरीर पर डकैती की धारा में थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार, बिल्डर, उसके बेटे के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मुकदमे में सबसे पहले अमित अग्रवाल पकड़ा गया था। उसके बाद पुलिस ने जितेंद्र कुमार को जेल भेजा। बिल्डर, बेटे और पुरुषोत्तम पहलवान पर दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। शानिवार को पुरुषोत्तम पहलवान को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस को उसने बताया कि बिल्डर से उसकी पुरानी पहचान है। बिल्डर अखाड़े पर बादाम भिजवाया करते थे। कभी कोई प्रतियोगिता होती थी उसमें चंदा भी दे दिया करते थे। वह तो संबंधों में मारा गया। बिल्डर का एक आदमी किशोर बघेल है। वह ट्रैक्टर ट्राली में सामान भरकर ले गया था। किशोर बघेल के बारे में जानकारी में आया है कि वह दबंग प्रोपर्टी डीलर है। बिल्डर का खास है। किशोर बघेल के बारे में पुलिस ने और छानबीन की तो पुलिस के होश उड़ गए।
नौ अक्तूबर को आबकारी विभाग की टीम ने विवादित भूखंड पर दबिश देकर अवैध शराब बरामद की थी। मौके से पूनम और पुष्पा को गिरफ्तार किया था। दोनों को दस अक्तूबर को जेल भेजा गया था। नौ अक्तूबर को बैनारा फैक्ट्री के पीछे बलवा हुआ था। किशोर बघेल उसके बेटे और साथियों ने मारपीट की थी। मारपीट में योगेश बघेल का सिर फूट गया था। तीन लोग जख्मी हुए थे। पुलिस ने योगेश बघेल की तहरीर पर 15 अक्तूबर को बलवा, मारपीट, धारदार हथियार से प्रहार, जान से मारने की धमकी और गाली-गलौज की धारा के तहत मुकदमा दर्ज किया था। मुकदमे में किशोर बघेल, भोला, रामू बघेल, लक्की, योगेश अग्रवाल और दीन दयाल वर्मा को नामजद किया गया था। पुलिस ने इन आरोपियों से किसी को नहीं पकड़ा। 15 अक्तूबर के बाद ही जमीन पर कब्जा हुआ था। पुलिस की जांच के अनुसार कब्जा 18 अक्तूबर से 20 अक्तूबर के बीच हुआ था। किशोर बघेल भी मौके पर आया था। जबकि वह जगदीशपुरा पुलिस का वांछित था। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज था। उसे पुलिस का भय नहीं था। यह तभी संभव है जब पुलिस से सेटिंग हो। जिस दौरान उसने सामान भरा उस समय वह वांछित था। उसे इस बात का खौफ नहीं था कि पुलिस पकड़ लेगी। किशोर बघेल के खिलाफ जो मुकदमा दर्ज हुआ था वह अभी तक लंबित है। इस बात को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं
बिल्डर पर घोषित इनाम की रकम बढ़ सकती, होटल में हुई थी डील, पुलिस जांच में जुटी
बिल्डर पर घोषित इनाम की रकम बढ़ सकती है। इतना ही नहीं, पुलिस को जानकारी मिली है कि जमीन पर कब्जे की डील राजपुर चुंगी स्थित एक होटल में हुई थी। चर्चित ने जमीन खाली कराने के लिए खर्चा करने वाले की मुलाकात पुलिस से कराई थी। पुलिस इसी मीटिंग के साक्ष्य जुटा रही है। डील के दौरान होटल में कौन-कौन मौजूद था। यह पता लगाने के लिए सर्विलांस टीम की मदद ली जा रही है। एसआईटी की अभी तक की जांच के अनुसार जमीन पर कब्जे की रणनीति जल्दबाजी में बनी थी। जमीन की कथित मालकिन उमा देवी ने मई में जमीन का सौदा मथुरा की एक पार्टी से कर दिया था। एग्रीमेंट हो गया था। जून में बिल्डर और उनके साथियों को इस बात की जानकारी हो गई थी। जमीन पर कब्जा लिया जाना था। इसके लिए ऐसे थाना प्रभारी की जरूरत थी जो ज्यादा दिमाग नहीं लगाए। उसे जो बताया जाए करता जाए। जून में जितेंद्र कुमार को थाना प्रभारी बनवाया गया। जुलाई में जमीन पर जेसीबी मशीन से सफाई कराई गई थी। इसकी जानकारी होने पर बिल्डर और जमीन पर नजर लगाए लोग सकते में आ गए। उन्हें लगा कि अब काम जल्दी करना होगा। जमीन हाथ से जा सकती है। पुलिस क्या मदद कर सकती है। इस पर मंथन शुरू हो गया। पहले रवि कुशवाह के परिवार को धमकियां दिलवाई गईं। उन्हें अपने साथ मिलाने के प्रयास किए गए। बात नहीं बनी। पुलिस ने उसे थाने बुलाना शुरू किया। वह थाने नहीं गया। उसके बाद रवि कुशवाह सहित तीन लोगों को गांजे में जेल भेजा गया। महिलाएं बच गईं। वे भी जमीन से हटने को तैयार नहीं थीं। इसलिए उन्हें वहां से हटवाने के लिए एक और मुकदमा दर्ज कराया गया।











