नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ब्रिटेन दौरे पर हैं। थिंकटैंक ब्रिज इंडिया की ओर से आयोजित आइडियाज फॉर इंडिया सम्मेलन में उन्होंने जो कुछ कहा, उस पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। ट्विटर पर लोग उनकी जम कर आलोचना कर रहे हैं। उनके बयान को लेकर भारत में ही उनकी काफी किरकिरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भारत एक राष्ट्र नहीं बल्कि यूनियन ऑफ स्टेट है। कुछ दिन पहले संसद में भी उन्होंने यह बयान दिया था। इसे लेकर काफी हंगामा हुआ था। उन्होंने देश की घरेलू राजनीति का जिक्र कर कहा कि बीजेपी का काम आवाजें दबाना है। पूरे देश में केरोसीन फैला है। बस आग लगाने के लिए चिंगारी की जरूरत है।
राहुल गांधी ने वार्ता सत्र में कहा कि संविधान के अनुसार, भारत राष्ट्र नहीं है। इसके बजाय इसे राज्यों के संघ के रूप में वर्णित किया गया है। यह बात राहुल पहले भी कर चुके हैं। एक यूजर ने लिखा कि राहुल जी क्या आप भारत को राष्ट्र के रूप में नहीं देखते हैं? कहीं आप इटली का संविधान तो नहीं देख रहे हैं? देख लीजिए भारत का प्रिएंबल..। लेखक संक्रांत सानू ने लिखा कि यह पूरी तरह से झूठ है, राहुल गांधी लगता है कि अमेरिकी इतिहास पढ़ रहे हैं। राज्य एक साथ नहीं आए। स्वतंत्रता के बाद राज्यों को बार-बार पुनर्गठित किया गया और उनकी कोई निश्चित पहचान नहीं थी। भारत एक सिविलाइजेशनल एंटिटी है जो हजारों साल पुरानी है।
एक यूजर ने लिखा- इन लोगों को अपनी कहानी सीधी करने की जरूरत है। पहले एक कॉमेडियन कुछ बकवास लिखता है जिसे आइडिया आफ इंडिया कहा जाता है, फिर दूसरा कॉमेडियन कहता है कि 2 भारत हैं, फिर एक और कहता है कि कोई भारत नहीं है – सिर्फ राज्यों का एक संघ। आगे क्या? लेखक आनंद रंगनाथन ने कहा कि राहुल गांधी के भाषण का सबसे चिंताजनक हिस्सा उनका यह मूर्खतापूर्ण दावा नहीं था कि भारत एक राष्ट्र नहीं है। अलबत्ता, उनका यह दावा था कि देश अब मिट्टी के तेल में डूबा हुआ है, आपको बस एक चिंगारी चाहिए। वह क्या योजना बना रहे हैं? यह आदमी खतरनाक है।
राहुल ने मौजूदा शासन पर देश को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस की विचारधारा इससे लड़ने के लिए तैयार है। वह बोले कि कृपया समझें, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का काम शोर मचाना और आवाजें दबाना है। जबकि, हम सुनते हैं। ये दो अलग चीजें हैं, ये दो अलग डिजाइन हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने चेताया कि पूरे देश में केरोसीन (मिट्टी का तेल) फैला हुआ है और आग लगाने के लिए बस एक चिंगारी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक कार्यकर्ता से कहा जाता है कि आप यह कहेंगे और कुछ नहीं। यह कार्यकर्ता लोगों के गले के नीचे खास तरह के विचारों को उतारने के लिए तैयार किया गया है, फिर चाहे वह कम्युनिस्ट विचारधारा हो या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सोच।
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