आगरा। एक इंस्पेक्टर ने दुष्कर्म, गाली गलौज, धमकी की धारा में दर्ज हुई एफआईआर की विवेचना में जिस चश्मे से आरोपियों को दोषी माना, पता नहीं क्या हुआ उनके चश्मे की नजर बदल गई। फिर उसी चश्मे से उन्होंने दोबारा खुद ही विवेचना कर 6 लोगों को निर्दोष माना। उनके नाम निकाल दिए। अधिकारियों के द्वारा प्रारंभिक जांच कर उन्हें मिसकंडक्ट टिप्पणी दी गई है। इसके कटने तक उन्हें चार्ज नहीं मिल सकता है। यह विवेचना विभाग में चर्चा का विषय बन गई है।
मामला छत्ता थाना क्षेत्र का है। यहां की एक युवती ने फिरोजाबाद के सुहाग नगर हिमायूंपुर के रहने वाले राहुल पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण का आरोप लगाया था। युवती का आरोप था कि उसकी पूर्व में शादी हो चुकी थी।यह बात उसने राहुल को भी बताई। मगर, उसने झूठे प्यार का दिखावा करके आर्य समाज मंदिर में ले जाकर शादी कर ली। इसके बाद शारीरिक शोषण किया और उससे रकम भी हड़प ली। बाद में युवती को पता चला कि राहुल दूसरी युवती से शादी कर रहा है। पीड़िता ने इसको लेकर राहुल के स्वजन से शिकायत की, लेकिन उन्होंने जान से मारने की धमकी देकर मुंह बंद रखने को कहा। पीड़िता की तहरीर पर छत्ता थाने में 11 मई 2023 को दुष्कर्म, गाली गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ। इसमें राहुल के साथ-साथ उसके पिता, मां और चार भाइयों को भी नामजद कर दिया गया। तत्कालीन इंस्पेक्टर छत्ता अनुराग शर्मा ने विवेचना कर इसमें राहुल के खिलाफ दुष्कर्म और उसके अन्य सभी स्वजन के खिलाफ गाली गलौज और धमकी देने की धारा में चार्जशीट लगा दी। थाने से जमानत पर सभी को छोड़ दिया गया। कुछ समय बाद उन्होंने खुद ही इस मामले में दोबारा विवेचना की। दोबारा चार्जशीट तो लगाई लेकिन केवल राहुल के खिलाफ। इसमें राहुल के स्वजन को क्लीनचिट दे दी गई। मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो विभागीय जांच कराई गई। डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि विभागीय जांच में इंस्पेक्टर अनुराग शर्मा को दोषी पाया गया है। इसके बाद उनकी सत्यनिष्ठा संदिग्ध मानते हुए दंडित किया गया है।
इधर इंस्पेक्टर अनुराग शर्मा वर्तमान में गाजियाबाद में तैनात हैं। विभागीय जांच के बाद दंडित किए जाने के कारण उन्हें वहां थाने का चार्ज नहीं मिल सकता है।











