आगरा। आईपीएस प्रभाकर चौधरी के कार्यकाल में 41 कारखासों पर लाइन हाजिर की कार्रवाई होने के बाद इंस्पेक्टरों ने कारखास बनाना बंद कर दिए थे। कांस्टेबलों ने भी कारखास बनना बंद कर दिया था, लेकिन प्रभाकर चौधरी के जाने के बाद फिर से कारखास बनना शुरू हो गए और वसूली भी। शाहगंज थाने के दो कांस्टेबल कारखासी के चलते देर रात निलंबित किए गए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने साठगांठ कर जुआरियों को थाने से छोड़ दिया। कमिश्नर तक मामला पहुंचने के बाद कमिश्नर ने लताड़ लगाई तो जुआरियों का शांति भंग में चालान किया गया।
चंद दिन पहले शाहगंज थाने में दो जुआरी पकड़े गए थे। दोनों के पकड़े जाने के बाद उन्हें छोड़े जाने को लेकर डील शुरू हो गई। चर्चा है कि उनसे अच्छा वाला फील गुड भी कर लिया गया। किसी ने कमिश्नर से शिकायत कर दी कि दो जुआरी कारखासी करने वाले दो कांस्टेबल ने छोड़ दिए हैं। कमिश्नर ने फोन कर लताड़ लगाई तो उनका शांति भंग में चालान किया गया। चर्चाएं यह भी है कि थाने में अभी चार कारखास और बचे हुए हैं। डीसीपी सिटी सूरज कुमार राय ने बताया कि कांस्टेबल मुनेंद्र और सोमवीर को निलंबित किया गया है। दोनों के खिलाफ पुलिस आयुक्त से शिकायत हुई थी। छानबीन कराई गई। एसीपी ने जांच के बाद दोनों सिपाहियों के खिलाफ रिपोर्ट दी थी। उनकी कार्यप्रणाली से पुलिस की छवि खराब हो रही थी। इसी वजह से दोनों को निलंबित किया गया है। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश दिए गए हैं। इधर सवाल यह भी खड़े हो रहे हैं कि क्या सिर्फ यह दो कांस्टेबल ही दोषी थे? कोई अन्य नहीं?











