आगरा। मंगलवार को लघु वाद न्यायालय में जामा मस्जिद की सीढ़ियों का ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार सर्वे कराने से संबंधित वाद में बहस हुई। मामले में अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।
एएसआई ने वर्ष 1920 में जामा मसजिद को संरक्षित घोषित किया था। जामा मस्जिद के नोटिफिकेशन में मस्जिद के चारों तरफ किसी प्रकार के निर्माण और किसी प्रकार के इस्लामिक आयोजन का उल्लेख नहीं है। वर्तमान में जामा मस्जिद के चारों तरफ रोड है। मस्जिद में बनी दुकानों का उपयोग व्यापारिक उद्देश्य से हो रहा है। जामा मस्जिद राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है, जिसके चारों तरफ 100 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं हो सकता है। प्रतिवादी एएसआई ने आज तक इस पर कार्रवाई नहीं की है। उधर, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संरक्षित सेवा ट्रस्ट आदि बनाम उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड आदि में लघु वाद न्यायाधीश के न्यायालय में सुनवाई हुई।
वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पहले महानिदेशक अलेक्जेंडर कनिंघम ने अपनी रिपोर्ट ‘ए टूर इन ईस्टर्न राजपूताना 1882-83’ में औरंगजेब द्वारा श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के श्रीकृष्ण विग्रह को कुदसिया बेगम की सीढ़ियों के नीचे दबवाने का उल्लेख किया है।
जदुनाथ सरकार ने पुस्तक ‘मआसिर-ए-आलमगीरी-ए हिस्ट्री आफ द एंपरर औरंगजेब आलमगीर’ में श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर के श्रीकृष्ण विग्रह आगरा की बेगम साहिब मस्जिद की सीढ़ियों के नीचे दबवाने का उल्लेख किया है। प्रतिवादी जामा मस्जिद प्रबंध समिति ने भी आपत्ति में यह बात स्वीकारी है। कुदसिया बेगम और बेगम साहिब एक ही हैं। अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।











