-गौरव प्रताप सिंह-
आगरा। आगरा कमिश्नरेट में कई थानों की पुलिस पीड़ितों को न्याय दिलाने की जगह उनका ही 151 (शांति भंग) में चालान कर रही है। यह देख पुलिस कमिश्नर काफी नाराज हुए हैं। उन्होंने सभी थाना प्रभारी के लिए व्हाट्सएप ग्रुप पर लिखा है कि किसी पीड़ित का 151 करने से पहले 10 बार सोचना कि क्या यह जरूरी है।
पुलिस कमिश्नर जे रविंदर गौड चाहते हैं कि थाने से लेकर चौकी तक में बेहतर पुलिसिंग हो। जनता व पीड़ित को भी फीलगुड हो कि कमिश्नरेट में अच्छी पुलिसिंग हो रही है। पुलिस कमिश्नर पुलिस विभाग की छवि बेहतर बनाने के लिए शिष्टाचार नीति लागू करने से लेकर पीड़ित के घर एफआईआर की कॉपी पहुंचाने और पीड़ित की एक बार में सुनवाई करने के निर्देश दे रहे हैं। लेकिन पुलिस उनके आदेशों का पालन नहीं कर रही। उनके निर्देश पर जिस दिन जुआरियों को जुआ न कराने की शपथ दिलाई जाती है उसी दिन थाना पुलिस जुआ लूट लेती है। जिस दिन मीटिंग में वह यह बोलते हैं पीड़ित की एक बार में सुनवाई होनी चाहिए। उसके एक-दो दिन में कई ऐसे उदाहरण सामने आ जाते हैं कि पीड़ित के साथ ही अपराधी जैसा व्यवहार कर दिया जाता है। यही नहीं बड़ी उम्मीद के साथ उन्होंने शिष्टाचार नीति लागू की थी लेकिन पुलिस ने यह भी लागू नहीं होने दी। केवल फोटो खिंचाने तक यह देखी गई। धरातल पर वही हाल है जो पहले था। आलम यह है कि हमले में घायल पीड़ित से ही हमलावर को पकड़ने के लिए कहा जा रहा है। सदर में एक घायल युवक जब तहरीर देने गया तो उससे कहा गया हमला करने वाले हमलावर को पकड़कर वह खुद थाने ले आए। कमिश्नर के संज्ञान में जब यह बात पहुंची तो कमिश्नर ने जमकर क्लास ली। कमिश्नर के क्लास लेने के बाद रविवार सुबह एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इधर आगरा पुलिस पिछले कुछ महीनों से इस प्रकार की पुलिसिंग कर रही है कि पूरे प्रदेश में उसकी छवि खराब हो रही है। सदर इंस्पेक्टर के झूठ बोलने की वजह से पुलिस कमिश्नर को हाई कोर्ट के सामने भी शर्मिंदा होना पड़ा। सिकंदरा पुलिस ने एक चिकित्सक को ही हवालात में डाल दिया जिसकी वजह से प्रदेश भर में आंदोलन हुआ। यही नहीं पुलिस लाइन में तैनात तीन कांस्टेबल ने 60 विदेशी पर्यटकों को ताजमहल घूमा डाला। जगनेर की एक पुलिस चौकी से ही ट्रक चोरी हो गया। रामबाग से टीएसआई का वायरलेस ही चोर चोरी करके ले गया। इनर रिंग रोड चौकी से भी चोर पुलिस का प्रिंटर चोरी कर ले गया। यह बड़ी शर्म की बात है कि पुलिस को भी चोर निशाना बना रहे हैं। उनके अंदर पुलिस का खौफ नहीं रहा है। क्या यह इसलिए है कि पकड़े जाने के बाद वह छूट जाएंगे! क्योंकि शाहगंज में चोरों का गैंग छोड़ दिया गया था! और अभी तक जिम्मेदार पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई।
दूसरी ओर आगरा कमिश्नरेट में पीड़ितों का ही शांति भंग में चालान करने की परंपरा और शुरू कर दी गई है। कई मामले सामने आने के बाद पुलिस कमिश्नर इस बात पर क्रोधित हैं। उन्होंने व्हाट्सएप ग्रुप पर लिखा है कि किसी पीड़ित का 151 करने से पहले 10 बार सोचना की क्या यह जरूरी है। आक्रामक पक्ष का 151 कर दिया जाए। पुलिस कमिश्नर ने थाना प्रभारी के लिए लिखा है वह अपने थाने के सभी दरोगा और कांस्टेबल को निर्देश कर दें कि मैसेज का 100 प्रतिशत अनुपालन कराएं।
एसएसआई ने सीओ को लिए लिखा उल्टा सीधा
जहां एक और शिष्टाचार नीति लागू की गई थी, वहीं दूसरी ओर एक थाने के एसएसआई ने अपने एसीपी के लिए काफी उल्टा सीधा लिख दिया। व्यक्तिगत चीजों पर हमला बोला गया। एसीपी के पेशकार ने यह मैसेज एसीपी को दिखाया तो वह काफी उदास हुए। एसीपी बहुत सज्जन हैं वह डीसीपी के सामने नम आंखें लेकर पहुंचे। जो शब्द लिखे गए थे वह उन्हें काफी चुभ रहे थे। इसके बाद एसएसआई को लाइन हाजिर किया गया। जिस पेशकार ने मैसेज दिखाया था उसे वाह वाही मिली और टॉप 5 में शामिल एक चौकी मिली।
पीड़ित का शांति भंग में चालान करने पर विधायक हुए नाराज
एक पीड़ित के द्वारा यह शिकायत की गई थी कि कालिंदी विहार में उसके मकान पर अपराधी ने कब्जा कर लिया है। इंस्पेक्टर भी उसका साथ दे रहे हैं। शिकायत पर पीड़ित का ही शांति भंग में चालान कर दिया गया। इसके बाद पीड़ित ने न्यायालय में न्याय की गुहार लगाई। मामले में न्यायालय ने परिवाद के रूप में वाद को दाखिल कर लिया है। इधर एत्मादपुर विधायक डॉक्टर धर्मपाल सिंह भी पीड़ित के साथ एक अधिकारी से मिले। विधायक ने कहा कि यह आखिर हो क्या रहा है। ट्रांस यमुना इंस्पेक्टर अपराधी की ही मदद कर रहे हैं।
ताजगंज थाने के दरोगा के लिए क्या अलग से नियम बनेगा?
पुलिस विभाग में ताजगंज थाने का एक दरोगा सुर्खियों में छाया हुआ है। यह दरोगा जगदीशपुरा कांड में भी पीड़ित परिवार को जेल भेजने में शामिल था। एनडीपीएस वाली विवेचना इसी ने की थी जिसके तहत परिवार को नशीले पदार्थ में फर्जी तरीके से जेल भेजा गया था। कई महीने पहले इसका पूर्वी जोन में तबादला हो गया है, लेकिन दरोगा के द्वारा रवानगी नहीं कराई गई। जबकि उसे वहां चौकी भी आवंटित हो गई है। पुलिस कमिश्नर और एडिशनल पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर कई बार अभियान चले जिसके तहत सभी पुलिसकर्मी रवाना हो गए। लेकिन दरोगा ने फिर भी अपनी रवानगी नहीं कराई। दरोगा के ऊपर किस अधिकारी का हाथ रखा हुआ है, यह बात जानने के लिए सभी उत्सुक हैं। रवानगी कराने वाले अन्य पुलिसकर्मी बोल रहे हैं यह तो बहुत गलत बात है। क्या दरोगा के लिए अलग से नियम बनेगा। जब नियम हमारे लिए है तो उसके लिए क्यों नहीं।
अधिकारी ने मीटिंग में कहा-क्या फोन में टुकटुक करते हो, तो दो के उतरे चेहरे
एक अधिकारी के द्वारा महीने में अधीनस्थ अधिकारियों के साथ मीटिंग ली जाती है। अधिकारी को जानकारी हुई थी कि दो लोग मीटिंग के दौरान अपने फोन को टेबल के नीचे रखकर उसमें गेम खेलते हैं। मीटिंग के दौरान उन्होंने सभी पर नजर रखी तो दो अपने फोन में कुट कुट कुछ कर रहे थे। अधिकारी सामान्य रूप से बोले आप दो घंटे अपने फोन को अलग नहीं रख सकते हैं। क्या इसमें कुट-कुट करते रहते हैं। मीटिंग के बाद दोनों गेम खेलने वाले अधिकारी बोले आज साहब ने हमारे खेल को पकड़ लिया। लेकिन साहब को कैसे पता चला हम गेम खेलते थे।
लव गुरु छाए रहते हैं सुर्खियों में
आगरा कमिश्नरेट में साथी पुलिस कर्मियों ने एक कोतवाल को लव गुरु की उपाधि दे दी है। यह जिस जिले में भी जाते हैं, वहां पर महिला पुलिसकर्मियों को रूम पर बुलाने के मामले में सुर्खियों में छा जाते हैं। कई बार आरोप भी लग चुके हैं। आगरा में भी महिला पुलिसकर्मी की शिकायत के बाद यह थाने से हटे। सूत्रों का कहना है कि कार्य शैली में अभी भी सुधार नहीं है वह अपने मिशन पर लगे रहते हैं। इसलिए साथी पुलिसकर्मी उन्हें लव गुरु बोलने लगे हैं।











