आगरा। सिकंदरा थाना क्षेत्र में आज सुबह एक मजदूर का शव पेड़ पर लटका हुआ मिला। आत्महत्या करने से पहले उसने अपने मोबाइल में एक वीडियो भी बनाई। जिसमें गांव की पंचायत सचिव को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। परिजनों का कहना है कि वह उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रही थी। दरोगा भी बार-बार उन्हें फोन कर रहा था। जेल भेजने की धमकी दे रहा था। इसके डर से उन्होंने आत्महत्या कर ली।
खड़वाई गांव में पप्पू अपने परिवार के साथ रहते थे। उनके तीन बच्चे हैं। वह मजदूरी का काम करते थे। परिजनों ने बताया कि शुक्रवार सुबह जब वह सो कर उठे तो देखा कि पप्पू कमरे में नहीं थे। इसके बाद वह उन्हें बाहर खोजने के लिए निकल गए। बाहर जाकर देखा कि एक पेड़ पर उनका शव लटका हुआ था। शोर सुनकर ग्रामीण भी मौके पर आ गए। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। परिजनों ने शव को घर के दरवाजे पर रखकर जमकर हंगामा किया। पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव ले जाने का प्रयास किया तो परिजन कार्रवाई की मांग पर अड़ गए। पप्पू के मोबाइल में एक वीडियो भी मिला है। यह उन्होंने सुसाइड करने से पहले बनाया है। इसमें वह बोल रहे हैं कि मैं पढ़ा लिखा नहीं हूं। व्हाट्सएप नंबर किसी ने जोड़ दिया। वीडियो गलती से भेज दी। सचिव के पास चली गई या भेजी गई होगी। गांव वाले कह रहे हैं 40 हजार लगेंगे और मार भी पड़ेगी। मुझे सेक्रेटरी की वजह से जान देनी पड़ रही है। मेरा कोई कसूर नहीं है। मुझे फंसाया गया है। सरकारी आदमी है। केस लग गया तो मेरे बच्चे परेशान हो जाएंगे। मैं दर-दर भटक रहा हूं। कभी चूरन बेचता हूं। कभी मजदूरी करता हूं। किसी ने मेरे साथ धोखा किया है। वीडियो को पुलिस ने अपने संज्ञान में ले लिया है और जांच शुरू कर दी है। पप्पू के भाई शाहरुख ने बताया कि पप्पू भैया तीन दिन से बहुत परेशान थे। उन्होंने कहा था कि सिकंदरा थाने में मेरे खिलाफ एफआईआर हुई है। जिसमें रोज दरोगा का फोन आता है। उसने कहा है तुम्हें जेल भेज देंगे। इसके बाद उन्होंने सुसाइड कर लिया। पत्नी और उनकी बेटी का कहना है कि पंचायत सचिव के द्वारा प्रमाण पत्र नहीं बनाया जा रहा था। इस बात को लेकर उनसे बहस हुई थी। उन्होंने थाने में शिकायत कर दी, जिसके बाद पुलिस लगातार परेशान कर रही थी। इसलिए उन्होंने सुसाइड कर लिया। इधर पंचायत सचिव ने अपनी सफाई में कहा है कि घटना से मेरा कोई लेना-देना नहीं है।











