आगरा। आगरा कमिश्नरेट में हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी में पुलिस फेल साबित हो रही है। थाना, चौकी और बीट पुलिस को यही नहीं पता उनके क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर क्या कर रहा है। रकाबगंज थाना क्षेत्र के एक हिस्ट्रीशीटर ने अपने गिरोह के साथ अपने ही थाना क्षेत्र की गारमेंट की दुकान में चोरी कर ली। पुलिस को इस बात की भनक भी नहीं लगी। कैमरों से पुलिस ने चोरी करने वालों की शिनाख्त की। इसके बाद पता चला इसमें हिस्ट्रीशीटर शामिल था। पुलिस मुठभेड़ में उसके पैर में गोली लगी है। उसके चार अन्य साथी भी पकड़े गए हैं। चोरी तो खुल गई चोर भी पकड़ा गया। लेकिन हाईटेक पुलिस के दावे फेल हो गए।
फोर्ट चौकी क्षेत्र में एक गारमेंट की दुकान में चोरी हुई थी। तहरीर पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया और चोरों की तलाश शुरू कर दी। कैमरों से पुलिस ने चोरों की शिनाख्त कर ली। सामने आया कि हिस्ट्रीशीटर चूचू ने चोरी की थी। देर रात पुलिस ने उसे पकड़ने का प्रयास किया तो उसने पुलिस के ऊपर फायरिंग कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में उसके पैर में गोली लगी जिसके बाद वह घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद पुलिस ने उसे और उसके चार साथियों को गिरफ्तार कर लिया। हिस्ट्रीशीटर के पकड़े जाने के बाद सवाल यह खड़े हो रहे हैं कि उनकी निगरानी सही तरीके से क्यों नहीं हो रही? अधिकारियों के द्वारा भी हर मीटिंग में अपने क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटरों पर निगरानी रखने के निर्देश दिए जाते हैं। पुलिस उनका डोजियर भी भरती है कि वह वर्तमान में क्या काम कर रहे हैं। इधर आगरा में तो एप से भी अपराधियों की निगरानी करने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन यह ऐप लगातार फेल साबित हो रहे हैं। बीते दिनों सिकंदरा में ज्वैलर्स हत्याकांड में शामिल हत्यारोपी फारूख ने भी बड़ी आसानी से दीवानी में आत्मसमर्पण कर दिया। इसे भी कोई ऐप नहीं पकड़ पाया।











