आगरा। एत्मादपुर थाना क्षेत्र में बुधवार को एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। आरबीएस स्कूल की जर्जर बस ने नौ साल की मासूम छात्रा की जिंदगी निगल ली। स्कूल से छुट्टी के बाद घर लौट रही छात्रा बस के टूटे हुए फर्श से नीचे सड़क पर जा गिरी और देखते ही देखते बस का पहिया उसके ऊपर से गुजर गया। कुछ ही सेकंड में मासूम की सांसें थम गईं।
कुबेरपुर के गांव नगला लाले में रहने वाले ब्रह्मजीत घर-घर दूध देने का काम करते हैं। उनकी बड़ी बेटी परी कक्षा तीन व छोटी बेटी आठ वर्षीय नैना कक्षा एक में भागूपुर, कुबेरपुर के आरबीएस इंटर कालेज में पढ़ती थीं। बुधवार सुबह रोज की तरह दोनों बेटियां बस से विद्यालय गई थीं। परिवार के भाई दिनेश कुमार ने बताया कि विद्यालय के छुट्टी के बाद दोनों बहनें विद्यालय की बस से घर आ रही थीं। बिना नंबर की बस काफी जर्जर हालत में है, बैट्री बाक्स के पास बस का फर्श टूटा होने के कारण चालक ने लकड़ी की फ्लाई लगा दी थी। इस स्थान पर दोनों बहनें बैठी हुई थीं। दोपहर करीब दो बजे बिहारीपुरा गांव के पास बस ब्रेकर पर उछल गई और टूर्ट फर्श पर लगी प्लाई हट गई। अचानक लगे झटके से नैना टूटे हुए फर्श से सड़क पर गिरकर पहिया की चपेट में आ गई। चालक को छात्रा के नीचे गिरने की जानकारी नहीं हुई। जब तक बच्चों ने शोर मचाया और बस रुकवाई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। साथ में पढ़ने वाली नैना की बड़ी बहन किसी तरह घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। खबर मिलते ही परिवार में चीत्कार और कोहराम मच गया। मां को जब अपनी नौ साल की बेटी की मौत की खबर मिली तो वह सदमे से बेहोश हो गई। गांव के लोग और परिजन दौड़ते-भागते अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें अपनी लाडली का निर्जीव शव ही मिला। नगला लाले गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई। जिसने भी सुना, उसकी आंखें नम हो गईं। पूरे गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। यह हादसा कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही खटारा स्कूल बसों की भयावह हकीकत को सामने ले आया है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में निजी स्कूल खुल चुके हैं और आसपास के गांवों के बच्चों को लाने-ले जाने के लिए पुरानी और जर्जर बसें सड़कों पर दौड़ाई जा रही हैं। इन बसों की हालत इतनी खराब होती है कि कई में फर्श तक गल चुके हैं, फिर भी उन्हें बच्चों से भरा जा रहा है। सवाल यह है कि स्कूल प्रबंधन बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा मुनाफे को क्यों प्राथमिकता दे रहा है? स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर परिवहन विभाग समय-समय पर इन बसों की कड़ी जांच करता, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टल सकता था।











