आगरा। मंगलवार को भारी संख्या में किसान आगरा विकास प्राधिकरण कार्यालय पर धरने के लिए पहुंचे। इनर रिंग रोड लैंड पार्सल तृतीय चरण की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को लेकर वह आक्रोशित थे। प्राधिकरण में सचिव की कार्यशैली से वह और खफा हो गए और धरने पर बैठ गए।
किसान नेता श्याम सिंह चाहर के नेतृत्व में सैकड़ों किसान आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) मुख्यालय पहुंचे और अधिकारियों पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने एडीए कार्यालय के गेट पर धरना देकर करीब एक घंटे तक किसी को अंदर आने और बाहर जाने नहीं दिया। किसानों का आरोप था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा था कि यदि जमीन ली जाए तो वर्तमान बाजार दर के अनुसार मुआवजा दिया जाए अथवा जमीन वापस की जाए, लेकिन एडीए अधिकारी इस नीति की अनदेखी कर सरकार की छवि खराब करने का काम कर रहे हैं। धरने के दौरान स्थिति को देखते हुए एडीए अधिकारियों ने थाना लोहामंडी प्रभारी निरीक्षक इंद्रजीत सिंह सहित कई थानों की पुलिस फोर्स मौके पर बुला ली। बाद में किसानों और एडीए अधिकारियों के बीच वार्ता हुई, लेकिन जब एडीए सचिव संजय सिंह ने किसानों को बताया कि न तो जमीन वापस की जा सकती है और न ही वर्तमान दरों पर मुआवजा दिया जा सकता है, तो किसान बैठक छोड़कर सीधे मंडलायुक्त आवास पहुंच गए। वहां भी किसानों ने एक घंटे तक धूप में धरना दिया और अपनी मांगों पर अड़े रहे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एसीपी सदर रामप्रवेश गुप्ता, सदर एसडीएम, एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाकर मंडलायुक्त कार्यालय ले गए, जहां किसानों और प्रशासन के बीच दोबारा वार्ता हुई। बैठक में अपर आयुक्त प्रशासन राजेश कुमार, एडीएम सिटी, सिटी मजिस्ट्रेट, एडीए सचिव संजय सिंह सहित एक दर्जन से अधिक अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में प्रशासन ने किसानों से सात दिन का समय मांगा और भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि या तो भूमि वापसी के विकल्प पर विचार किया जाएगा अथवा प्रथम चरण के किसानों की तरह उचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही 9 जून 2026 को इनर रिंग रोड लैंड पार्सल तृतीय चरण क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने का आश्वासन भी दिया गया। किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने आरोप लगाया कि एडीए सचिव ने किसानों के लिए कार्यालय के गेट बंद करा दिए और बैठक में किसानों को प्रवेश नहीं करने दिया। उन्होंने कहा कि जब किसानों को बुलाया गया था तो फिर उन्हें रोका क्यों गया। उन्होंने दो टूक कहा कि किसानों की मांग केवल दो हैं- जमीन वापस करो या वर्तमान बाजार दर के अनुसार मुआवजा दो। किसान नेता लाखन सिंह त्यागी ने आरोप लगाया कि इनर रिंग रोड लैंड पार्सल तृतीय चरण का भूमि अधिग्रहण पूरी तरह त्रुटिपूर्ण और किसानों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि संबंधित भूमि का वर्तमान मूल्य लगभग 49,500 रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जबकि किसानों को उचित मुआवजा नहीं दिया गया। उनका आरोप था कि एडीए और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलओ) की पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। किसान नेता सोमवीर यादव ने कहा कि 16 वर्ष बीत जाने के बाद भी किसान अपनी जमीन पर भौतिक कब्जे में हैं। यदि प्रशासन ने वास्तव में भूमि अधिग्रहण किया है तो जमीन आज तक किसानों के कब्जे में क्यों है। वहीं प्लॉट धारक नागेंद्र फौजी ने कहा कि एडीए अधिकारियों द्वारा लगातार अन्याय किया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ताज सिटी आलू उत्पादक समिति के प्रदेश सचिव लक्ष्मी नारायण बघेल ने किसानों के साथ अन्याय बंद करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो किसान बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे। किसान नेता मुकेश पाठक ने कहा कि अब किसान चुप बैठने वाले नहीं हैं। यदि 9 जून तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ तो सैकड़ों किसान मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचकर अनशन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ गांवों में आज तक केवल छह प्रतिशत मुआवजा ही वितरित हुआ है, जबकि अनिवार्य अवार्ड की प्रक्रिया के लिए 80 प्रतिशत मुआवजा भुगतान आवश्यक माना जाता है। किसानों ने अधिग्रहण प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की।










