आगरा। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी के ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ के तहत गुरुवार को आगरा में सियासी पारा चढ़ गया। कलेक्ट्रेट घेराव के ऐलान के बाद पुलिस-प्रशासन ने सुबह से ही शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। इसके बावजूद सपा कार्यकर्ता पुलिस को चकमा देते हुए कलेक्ट्रेट पहुंच गए और जमकर नारेबाजी की। सुभाष पार्क से कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो नोकझोंक के बाद धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शनकारियों के बढ़ते दबाव को देखते हुए डीसीपी सिटी सैयद अली पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया और कलेक्ट्रेट क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस फोर्स तैनात कर दी। पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। सपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। सपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रामजीलाल सुमन को पुलिस ने उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर नजरबंद कर रहा है। सुमन ने कहा कि “यह चुनाव आयोग नहीं है, मोदी आयोग है। हमारे घर पर भी आकर पुलिसवाले बैठ गए हैं। यह मामला बहुत गंभीर है। लोकतंत्र के साथ मजाक है।” सपा नेताओं का आरोप है कि कई कार्यकर्ताओं को उनके घरों में ही रोक दिया गया, जबकि रास्ते में मिलने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। पार्टी से जुड़े लोगों के मुताबिक, कुछ नेताओं के घरों के बाहर रात से ही पुलिस तैनात कर दी गई थी। इसके बावजूद कई कार्यकर्ता पुलिस की निगरानी को चकमा देकर कलेक्ट्रेट पहुंच गए। सपा कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की आवाज बताते हुए प्रदर्शन किया।
सीईसी के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने भी ‘काला दिवस’ मनाया। एआईसीसी के निर्देश पर आयोजित विरोध कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लोकतंत्र और मताधिकार की रक्षा का मुद्दा उठाया। अमित सिंह के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए और संवैधानिक शक्तियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया। कांग्रेस ने चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया।










