आगरा। डॉ. भीमराव आम्बेडकर विश्वविद्यालय में आज कोर्ट की बैठक हुई। कोर्ट की बैठक में आईटीएचएम के निदेशक प्रो. लवकुश मिश्रा ने कई ऐसे सवाल पूछे जिनका विश्वविद्यालय के अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था। प्रो. मिश्रा की वजह से एक बात और सामने निकलकर आई कि विश्वविद्यालय ने मेरठ की बैंकों में एफडी करा रखी है।
प्रो. मिश्रा ने कोर्ट की बैठक में पूछा कि शिवाजी मण्डपम व संस्कृति भवन के निर्माण की आखिर विश्वविद्यालय में क्या आवश्यकता थी? जितने रुपयों में इन्हें बनाने का बजट पास हुआ था उससे ज्यादा रुपए कैसे लग गए?
वर्ष 2017 से अभी तक कॉलेजों में सम्मिलित होने वाले विद्यार्थियो की संख्या और परीक्षा फीस तथा बकाया राशि कॉलेज वाइज सभी सदस्यों को उपलब्ध कराए जाने की उन्होंने मांग की। प्रोफेसर लवकुश मिश्रा ने वित्त अधिकारी से जब यह पूछा कि क्या विश्वविद्यालय का पैसा आगरा से बाहर की बैंकों में भी जमा है। इस पर वित्त अधिकारी एके सिंह ने बताया की वर्ष 2017 में मेरठ में पांच करोड़ रुपये की एफडी कराई गई थी। यह सुनकर सभी सदस्य आश्चर्यचकित रह गए। प्रो. मिश्रा ने कहा कि आगरा में क्या सभी बैंकों पर ताले लग गए थे जो मेरठ में एफडी कराई गई। इधर प्रोफेसर लवकुश मिश्रा के द्वारा लगातार सवाल किए जाने से कुछ शिक्षकों ने कुलपति के निर्देश का हवाला देते हुए मीटिंग खत्म करने के लिए इशारा किया। इस पर प्रोफेसर मिश्रा नाराज हो गए। वह बोले कि जब मीटिंग में किसी को बोलने का अधिकार ही नहीं है तो यह हो क्यों रही है।
प्रोफेसर मोहम्मद अरशद ने अलीगढ़ विश्वविद्यालय के लिए दिए गए 100 करोड़ रुपये शासन से वापस लिए जाने की मांग की। प्रोफ़ेसर भूपेंद्र शर्मा ने कहा कि जीपीएफ पर कम ब्याज मिल रहा है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों के GPF को अनुचित तरीके से इंडियन बैंक में जमा किया जा रहा है। बैठक में प्रति कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा, कुलसचिव संजीव कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्ण यादव, डीन एकेडमिक संजीव कुमार, प्रोफेसर पीके सिंह, डॉ. रोशन लाल, डॉक्टर जगदीश वशिष्ठ आदि उपस्थित रहे।












